कुरुक्षेत्र। सर्दी बढ़ने के साथ खादी और ऊनी कपड़ों की मांग भी बढ़ गई है। खादी केंद्र में नई वैरायटी के लिए निरंतर दूर दूर लोग पहुंच रहे हैं। हर बार सर्दियों में खादी और ऊनी कपड़ों की मांग बहुत बढ़ जाती है क्योंकि ये प्राकृतिक रूप से गर्म होते हैं, शरीर को ठंड से बचाते हैं, हवादार होते हैं और त्वचा के लिए आरामदायक माने जाते हैं।
खादी ग्रामोद्योग संघ मिर्जापुर नरड़ के सचिव एवं व्यवस्थापक सतपाल सैनी बताते हैं कि विशेषकर खादी, जो सूती, रेशम या ऊन से चरखे पर बनती है, सर्दी में गर्माहट देती है और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। खादी वैसे तो हर मौसम के लिए उपयुक्त होते हैं, लेकिन सर्दियों में इनकी गर्माहट बहुत पसंद की जाती है। नए फैशन में भी खादी ने विशेष स्थान बनाया है। सरकार भी मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के तहत खादी को बढ़ावा दे रही हैं, जिससे इसका उत्पादन और बिक्री बढ़ रही है। फैशन डिजाइनरों ने खादी को पारंपरिक और आधुनिक शैलियों में ढालकर इसे एक फैशन स्टेटमेंट बनाया है, जिससे इसकी अपील बढ़ी है। सैनी ने बताया कि आजकल उनके पास खादी कपड़ों के साथ सदरियां (बंडी), शॉल, स्वेटर, मफलर, कंबल, रजाई. ऊनी स्वेटर, कार्डिगन, जैकेट, मोजे, दस्ताने, टोपियां, कश्मीरी शॉल इत्यादि की अच्छी मांग है।