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Kurukshetra News: श्रीराम जन्म भूमि अयोध्या से सीधे श्रीकृष्ण की कर्मस्थली पहुंचेंगे प्रधानमंत्री मोदी

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कुरुक्षेत्र। शहीदी समागम के लिए तैयार किया गया मुख्य पंडाल। संवाद 
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कुरुक्षेत्र। जिस धरा पर नौवें सिख गुरु तेग बहादुर जी का सन 1665 में आगमन हुआ, उसी पर उनके 350वें शहीदी दिवस को बेहद खास अंदाज में मनाए जाने की तैयारी है। इसके लिए धर्मनगरी पूरी तरह से सजकर तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गीता उपदेश स्थली ज्योतिसर में करीब 170 एकड़ में आयोजित किए जा रहे शहीदी समागम में मुख्य तौर पर पहुंचेंगे। वे इसी दिन पहले श्रीराम की जन्म भूमि अयोध्या जाएंगे, जहां से सीधे शाम करीब चार बजे भगवान श्रीकृष्ण की कर्मस्थली कुरुक्षेत्र पहुंचेंगे। ऐसे में वे पूरे देश के लिए बड़ा संदेश देने वाले हैं।
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प्रधानमंत्री सीधे समागम स्थल के साथ बनाए गए हेलिपेड पर उतरेंगे, जहां से वे पहले 206 करोड़ की लागत से तैयार किए गए महाभारत अनुभव केंद्र का अवलोकन करने पहुंचेंगे। केंद्र परिसर में ही करीब दो करोड़ से तैयार पंचजन्य स्मारक का उद्घाटन करेंगे जिसके बाद वे समागम स्थल पर लौटेंगे। यहां गुरुग्रंथ साहिब के समक्ष माथा टेकेंगे और गुरु तेग बहादुर जी व उनके परिवार के जीवन एवं संघर्ष पर लगाई गई खास प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे। इसके बाद समागम स्थल पर पटियाला के 350 बच्चों की ओर से किए जाने वाले कीर्तन का भी श्रवण करेंगे। इसके बाद वे समागम में संबोधन और फिर सड़क मार्ग से वे गीता महोत्सव में पवित्र ब्रह्मसरोवर तट पर पहुंचकर महाआरती करेंगे। इसी दौरान पुरुषोत्तमपुरा बाग में स्थित श्रीकृष्ण अर्जुन रथ के समक्ष सामूहिक चित्र होगा। यहां से सड़क मार्ग से ही अंबाला की ओर रवाना हो सकते हैं।
प्रधानमंत्री गुरु जी पर जारी करेंगे डाक टिकट व सिक्का
प्रधानमंत्री मोदी समागम में गुरु तेग बहादुर जी के जीवन व संघर्ष पर विस्तार से चर्चा करेंगे, वहीं उनके नाम पर डाक टिकट व सिक्का भी जारी करेंगे। प्रधानमंत्री कीर्तन मुख्य मंच के समीप ही नीचे बैठकर श्रवण करेंगे जिसके बाद मंच पर जाकर संबोधित करेंगे। इस दौरान वे लंगर भी चख सकते हैं।
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पुलिस छावनी बनी धर्म धरा, सेना के हेलिकॉप्टर उतारकर जांचे हेलिपेड
प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के चलते सुरक्षा के बेहद कड़े बंदोबस्त किए गए हैं। मंगलवार को होने वाले आयोजन के लिए रविवार को ही करीब 15 एसपी के निर्देशन में पूरे क्षेत्र को पुलिस छावनी बना दिया गया है। समागम स्थल के साथ ही तीन हेलिपेड बनाए गए हैं जिनकी जांच के लिए रविवार को सेना का हेलिकॉप्टर उतारा गया। वहीं पूरी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एसपीजी डेरा डाले हुए हैं।
गुरु तेग बहादुर जी 1665 में पहली बार आए कुरुक्षेत्र
गुरु तेग बहादुर के धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में छह बार आने की चर्चाएं हैं लेकिन नौवीं पातशाही गुरुद्वारा के मुख्य ग्रंथी अमरीक सिंह बताते हैं कि वे दो बार ही यहां आए थे। पहली बार 1665 में देश के पूर्व क्षेत्र में सिख धर्म का प्रकाश करने के लिए दमदमा साहिब से चलकर कैथल होते हुए कुरुक्षेत्र पहुंचे थे। यहां महादेव मंदिर के समीप तीन दिन तक अपनी वाणी का प्रकाश किया था। इसके बाद शहीदी देने के लिए भी वे 1672 में कुरुक्षेत्र होते हुए दिल्ली गए थे।
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