हमें जिंदा रहना है तो प्राकृतिक खेती को अपनाना ही होगा। जीवन बचाने के लिए हमें संघर्ष से पीछे नहीं हटना चाहिए। प्राकृतिक खेती के जरिए ही हम जीवन बचाने का सबसे बड़ा कदम उठा सकते हैं। यह खेती घाटे का नहीं बल्कि सबसे बड़े फायदे का सौदा है।
यह कहना था गुरुकुल कुरुक्षेत्र के प्राकृतिक खेती फार्म पर पहुंचे फतेहाबाद के प्रगतिशील किसान आसंगा गांव के रहने वाले सूरजभान सिहाग, बन मदोदी के मनीष कुमार, चंद्रावल के सूरज व गांव नेहला के महाबीर सिंह का। जिन्होंने प्राकृतिक खेती पर खुलकर चर्चा की। गत दिवस केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के गुरुकुल फार्म पर अवलोकन के दौरान ही ये किसान पहुंचे थे और उन्होंने कृषि मंत्री को भी खुद के द्वारा की जा रही खेती व उससे मिले उत्पादन पर चर्चा की।
किसानों ने बताया कि वे पिछले चार से पांच साल से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं, जिसके लिए उन्हें फतेहाबाद के कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारी डॉ निर्मल कुमार ने प्रोत्साहित किया। उन्होंने पहले एक-दो एकड़ में खुद यह खेती शुरू की तो बाद में कुरुक्षेत्र में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत के प्राकृतिक खेती मॉडल को भी देखने का मौका मिला। इसके बाद उन्होंने अपने पूरे खेत में ही यही फसल अपनाने का फैसला किया। अब वे अपने पूरे खेत में ही प्राकृतिक खेती कर रहे हैं, जिसमें गेहूं, धान के साथ कईं सब्जियां भी शामिल हैं।
उनका कहना है कि पहले वे भी डरते थे कि उन्हें नुकसान होगा लेकिन पहले एक-दो साल कुछ फर्क भी पड़ा। जब उन्हें खेती की तकनीक पूरी तरह से पता चल पाई तो उत्पादन भी पहले की तरह ही होने लगा। अब पूरे परिवार को इस खेती से तैयार फैसल के अनाज को खाने की ही आदत हो गई है। इससे पहले केमिकल युक्त अनाज खाते रहे, जिससे बच्चों तक में बीमारी आम होने लगी थी। अब कईं बीमारियों से भी परिवार का बचाव है।
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अनाज खरीद की हो व्यवस्था तो मिले बढ़ावा
किसानों का कहना था कि अभी प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए अधिकतर किसान तैयार नहीं है। सरकार इसके लिए जागरूकता बढ़ाए और मार्केट व्यवस्था हो तो बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। किसानों का यह भी कहना था कि लोग शुद्ध अनाज तो खाना चाहते हैं और यही कारण है कि उनके पास इस खेती से तैयार अनाज को खरीद करने के लिए लोग एडवांस में भी पैसे जमा करवाने को तैयार रहते हैं।
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कृषि मंत्री भी जता गए गहन चिंता
केंद्रीय कृषि मंत्री ने भी प्राकृतिक खेती को देखने उपरांत गहन चिंता जताई थी कि हम केमिकल खा रहे हैं, जिसके चलते ऐसे हालात भी हो सकते हैं कि हमारे पास रहने के लिए जमीन नहीं बचेगी। कृषि मंत्री ने इस दौरान गन्ने के रस , गुड़ व हरे मटर का स्वाद चखा तो उन्होंने इसके स्वाद को ही लाजवाब करार दिया। वे मौके पर मौजूद किसानों को भी अपील कर गए कि वे इसके प्रति जागरूकता फैलाएं।