If there is no electricity in the field for eight hours, then drag Xen from the office and sit in the sun.
- फोटो : Kurukshetra
कुरुक्षेत्र। खेत में अगर आठ घंटे बिजली न आए तो एक्सईन को दफ्तर से बाहर खींचकर धूप में बैठा लो। उसके बाद चाहे प्रशासन वाले लाठी मारें या गोली, मगर डरना नहीं है। हमने अधिकारियों के आगे हाथ जोड़ लिए, विनती कर ली और पंचकूला तक ज्ञापन देकर गुहार लगा ली, मगर बिजली नहीं मिल रही, जबकि खेती के लिए आठ घंटे बिजली देने के दावे किए जा रहे हैं। यह बात भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष गुरनाम चढ़ूनी ने कही। वे सोमवार को बिजली निगम के एसई कर्ण सिंह भोरिया को मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन देने पहुंचे थे। उधर, भाकियू ने गेहूं पर 500 रुपये प्रति क्विंटल बोनस, मुआवजा सहित अन्य मांगों के समर्थन में अतिरिक्त उपायुक्त अखिल पिलानी को भी ज्ञापन सौंपा।
भाकियू ने कहा कि खेतों में आठ घंटे बिजली सुचारु रूप से दी जाए, क्योंकि बिजली कटौती और अघोषित कटों के कारण फसलें सूख रही है। गन्ना व सब्जी उत्पादन करने वाले किसान परेशान हैं। अब अगले सप्ताह से धान की पौध की बिजाई की जाएगी, जिसमें अधिक पानी की आवश्यकता होती है। अगर किसानों को खेती के लिए बिजली पर्याप्त नहीं दी गई तो बिजली निगम के खिलाफ बड़ा आंदोलन किया जाएगा। इस दौरान अगर किसी कर्मचारी और अधिकारी के साथ कुछ गलत हुआ तो उसका जिम्मा बिजली निगम का होगा। इससे पहले भाकियू ने लघु सचिवालय परिसर में सरकार के खिलाफ दो घंटे तक रोष प्रदर्शन किया। इस दौरान किसानों को संबोधित करते हुए गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि प्रदेश में बिजली व्यवस्था चरमरा चुकी है। बिजली न मिलने के कारण खेतों में फसलें पानी के कमी से सूख चुकी हैं। आरोप लगाया कि सरकार ने अडानी को फायदा पहुंचाने के लिए अपने बिजली प्लांट बंद करके बिजली खरीदनी शुरू कर दी। वहीं बिजली की कमी का खामियाजा किसान भुगत रहे हैं। अगर जल्द ही किसानों को खेती के लिए बिजली नहीं मिलती तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री से एक बार फिर गेहूं पर 500 रुपये प्रति क्विंटल बोनस की मांग की है। इसके अलावा आगजनी से किसानों की बर्बाद हुई फसलों के लिए मुआवजे की भी मांग की गई। ज्ञापन के माध्यम से फसल बीमा कंपनियों द्वारा किसानों को कम उत्पादन का क्लेम देने की मांग भी की गई है।
वहीं कृषि विभाग की ओर से क्रॉप कटिंग के सैंपल की रिपोर्ट सार्वजनिक न करने पर नाराजगी जताई गई है। किसानों को शक है कि क्रॉप कटिंग के माध्यम से कृषि व किसान कल्याण विभाग द्वारा अबकी बार गेहूं की पैदावार अधिक बताई गई है। मांग है कि क्रॉप कटिंग की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए।
लंबित ट्यूबवेल कनेक्शन हो जारी
चढ़ूनी ने कहा कि हरियाणा में 83 हजार से ज्यादा ट्यूबवेल कनेक्शन पेंडिंग पड़े हुए हैं। किसानों ने मोटर खरीद के बिल व सिक्योरिटी राशि भी जमा करा दी है, मगर लाखों रुपये भरने के बाद भी खेत अभी तक ट्यूबवेल के पानी का इंतजार कर रहे हैं, इसलिए सरकार जल्द से जल्द इन लंबित ट्यूबवेल कनेक्शन को जारी करे।