कुरुक्षेत्र। आयुष्मान भारत योजना के तहत निजी अस्पतालों को लंबे समय से भुगतान नहीं मिलने पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने कड़ा रुख अपनाया है। आईएमए का कहना है कि यदि सप्ताहभर के भीतर बकाया भुगतान नहीं किया गया तो सरकार के खिलाफ रणनीति बनाकर आंदोलन का मोर्चा खोला जाएगा। जिले के 35 से अधिक पैनल अस्पतालों की करीब 40 करोड़ रुपये की राशि पिछले चार माह से अटकी हुई है जिससे निजी चिकित्सकों में भारी रोष है।
अगस्त माह में जिलेभर के निजी अस्पतालों ने करीब 25 दिनों तक आयुष्मान कार्ड पर इलाज बंद कर दिया था। इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ा। गरीब और जरूरतमंद मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ा और सरकारी अस्पतालों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया था।
निजी चिकित्सकों ने आयुष्मान योजना से कुछ कैटेगरी के इलाज हटाए जाने पर भी आपत्ति जताई है। चिकित्सकों ने कहा कि कुछ इलाज श्रेणियां योजना से तो हटा दीं लेकिन उन मरीजों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। ऐसे में मरीज न तो आयुष्मान के तहत इलाज करा पा रहे हैं और न ही निजी खर्च वहन करने की स्थिति में हैं।
आयुष्मान पर डेढ़ हजार मरीज लेते हैं रोजाना इलाज
जिले में आयुष्मान कार्ड पर पैनल अस्पतालों में रोजाना औसतन एक से डेढ़ हजार मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें से 100 से 150 मरीज प्रतिदिन ऑपरेशन के लिए आते हैं। भुगतान नहीं मिलने की स्थिति में यदि फिर से इलाज बाधित होता है तो हजारों मरीजों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र मेहता ने बताया कि लगातार भुगतान में देरी के कारण अस्पतालों की आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है। कर्मचारियों का वेतन, दवाइयों की खरीद और जरूरी संसाधनों के संचालन में परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि अगस्त माह में भी भुगतान की मांग पर निजी अस्पताल संचालकों ने आंदोलन किया था लेकिन इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। सप्ताहभर में बैठकर कर आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।