स्वार के गांव पैगंबरपुर में किसान के खेत में जलती गेहूं की फसल।
पर्यावरण संरक्षण में कार्यरत ग्रीन अर्थ संगठन की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य मानव अधिकार आयोग ने प्रदेश के सभी जिला उपायुक्तों को 21 सितंबर को जवाब तलब किया है। संगठन ने आयोग को दी याचिका में मांग की थी कि फसलों के अवशेषों में किसानों द्वारा लगाई जा रही आग प्रशासन की ढिलाई के चलते नहीं रूक पा रही है, जिसके चलते प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, कृषि विभाग, जिला अधिकारियों, पंचायत अधिकारियों आदि पर सख्त कार्रवाई की जाए। जबकि शिकायत के लिए एक टोल फ्री नंबर व हेल्प लाइन शुरू की जाए। आयोग ने इसे गंभीरता से लेते हुए सभी जिला उपायुक्तों को नोटिस जारी किया है। उन्हें इस बारे में छ: सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करने का आदेश भी दिया है।
संगठन ने आयोग के सामने मामला उठाया था की किसान साल में दो बार फसलों के अवशेषों में आग लगाते हैं, जिससे निकलने वाले धुएं से अनेकों वाहन दुर्घटनाएं होती हैं। इन दुर्घटनाओं में लोगों की जान भी जा रही है। इसी वर्ष 2 मई को बाइक पर जा रहे पानीपत के सिंक गांव निवासी 12वीं कक्षा का छात्र 17 वर्षीय शौकीन व उसकी मां शीना गेहूं के फानों की आग की चपेट में आकर अपनी जिंदगी खो चुके हैं। इसके अलावा भी अक्टूबर-नवंबर में धान की पुराल में, मई-जून माह में गेहूं के फानों में आग से अनेकों सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। संगठन के सचिव डॉ. अशोक चौहान ने बताया की दुर्घटनाओं के अतिरिक्त आग से हरे-भरे पेड़ भी जलकर नष्ट हो रहे हैं। संगठन के सदस्य एवं पर्यावरण विषेशज्ञ नरेश भारद्वाज ने बताया की फानों की आग सभी के जीवन व पर्यावरण के लिए घातक हैं, इसे तुरंत रोका जाना अति आवश्यक है।