कुरुक्षेत्र। बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान और शारीरिक निष्क्रियता के चलते महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन तेजी से बढ़ रहा है। इसका सीधा असर गर्भावस्था पर पड़ रहा है, जिससे हाई-रिस्क डिलीवरी के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। यह स्थिति मां और शिशु दोनों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय मानी जा रही है।
जिला अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 1700 मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं। जिले के सरकारी अस्पतालों में हर माह करीब 400 डिलीवरी होती हैं, जिनमें से अधिकांश मामलों को डॉक्टर हाई-रिस्क की श्रेणी में मानते हैं।
आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक वर्ष में प्रदेशभर में 1369 मृत शिशुओं का जन्म हुआ, जबकि कुरुक्षेत्र जिले में यह संख्या 34 रही। डॉक्टरों के अनुसार प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन, व्यायाम की कमी और तनाव के कारण हार्मोन प्रभावित हो रहे हैं। इसके चलते महिलाओं में अनियमित माहवारी, वजन बढ़ना, थकान और मूड स्विंग्स जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। गर्भावस्था के दौरान यह असंतुलन हाई-रिस्क डिलीवरी का कारण बन सकता है।
ये हो सकते हैं समाधान : विशेषज्ञ के मुताबिक ताजे फल, सब्जियां, और पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करें। योग और हल्की एक्सरसाइज जैसे शारीरिक अभ्यास को अपने दिनचर्या में शामिल करें। गर्भावस्था के दौरान और पहले से ही नियमित रूप से डॉक्टर से संपर्क करें और अपनी स्वास्थ्य जांच कराएं। इसके अलावा तनाव कम करने के लिए ध्यान और अन्य तकनीकों को अपनाएं।
इन उपायों को अपनाकर महिलाएं अपने हार्मोनल स्वास्थ्य को बेहतर बना सकती हैं और हाई रिस्क डिलीवरी के जोखिम को कम कर सकती हैं।