जूनियर एशिया कप के बाद विश्व कप में कुरुक्षेत्र के हॉकी खिलाड़ी मिड फिल्डर मनप्रीत ने सबका मन जीत लिया। संसाधनों के अभाव को पछाड़ इस जूनियर हॉकी खिलाड़ी ने वर्ष 2015 में मलेशिया एशिया कप के बाद एक साल के भीतर यह दूसरी बड़ी उपलब्धि नवाबों के शहर लखनऊ में हासिल की है। एक साल के भीतर जूनियर हॉकी में दूसरा गोल्ड मेडल जीतने वाली टीम के सदस्य मनप्रीत से अमर उजाला ने फोन पर बात की तो उन्होंने इस ऐतिहासिक जीत का श्रेय पूरी टीम को दिया।
उन्होंने कहा कि जूनियर हॉकी में भारत ने विश्व कप हासिल कर देश का नाम ऊंचा किया है। मनप्रीत ने बताया कि दो दिन बाद वह कुरुक्षेत्र लौटेंगे और सबसे पहले अपने कोच गुरविंदर सिंह और जिला हॉकी एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास दीप संधू का आशीर्वाद लेंगे। जीत के बाद अपनी टीम के सदस्यों के साथ व्यस्त मनप्रीत ने बताया कि उनका लक्ष्य भारतीय हॉकी को खोया हुआ मुकाम दिलाना है। वहीं मनप्रीत के कोच गुरविंदर सिंह अपने शिष्य और भारतीय जूनियर हाकी की विजय पर गदगद दिखे। उन्होंने बताया कि जीटी रोड पर स्थित जिला कुरुक्षेत्र के छोटे से गांव इस्सरगढ़ वासी मनप्रीत सिंह जूनियर हाकी के उभरते सितारे के रुप में सामने आ रहे है।
उन्होंने बताया कि 2014 में मनप्रीत को भारतीय हॉकी जूनियर टीम में स्थान चेन्नई नेशनल टूर्नामेंट में दो बार मैन आफ द मैच के कारण मिला था। कोच के मुताबिक मनप्रीत ने पहले ही इंटरनेशनल टूर्नामेंट, मलेशिया में नवंबर 2015 में हुए जूनियर एशिया कप में शानदार प्रदर्शन किया। वहीं मनप्रीत के पिता कर्म सिंह से जब श्रीनगर में बात की गई तो उन्होंने बताया कि बेटे की इस उपलब्धि पर उन्हें गर्व है। ड्यूटी पर उनके साथी भी इस खुशी में शरीक हुए।
पिता सीमा पर और भाई सेना में देश सेवा को तत्पर
खेत मजदूर परिवार से संबंध रखने वाले विश्व विजेता जूनियर हॉकी टीम के खिलाड़ी मनप्रीत के पिता कर्म सिंह सीआरपीएफ में हवलदार हैं और पिछले 11 साल से श्रीनगर में तैनात हैं, जबकि हॉकी खिलाड़ी उनके बड़े भाई लवप्रीत भी दो साल पहले ही सेना में भर्ती हुए थे और इस समय लवप्रीत की पूना में तैनाती है। खेल कोटे में मनप्रीत भी इस समय रेलवे में टीटी के पद पर कार्यरत हैं और उनकी तैनाती ग्वालियर में है।
सरपंच और परिवार ने बांटी मिठाई
इस्सरगढ़ के सरपंच गुरुदत्त शर्मा ने मनप्रीत की उपलब्धि पर उनके परिवार को बधाई दी। परिवार ने भी इस खुशी में मिठाई बांट कर खुशी की इजहार किया। मनप्रीत के दादा, दयालराम, दादी लाजोदेवी, माता देबो देवी, प्राइवेट स्कूल की बस के ड्राइवर चाचा कर्मजीत सिंह और खेत मजदूर चाचा जसबीर सिंह ने कहा कि उनके लाल ने ना केवल उनके परिवार और गांव का बल्कि जिला, प्रदेश और देश का नाम रोशन किया है।
पीपली से स्टेडियम तक पैदल आता था मनप्रीत : कोच
कोच गुरविंदर सिंह ने बताया कि मनप्रीत की पारिवारिक आर्थिक हालत काफी कमजोर थी। मेरे पास पहली बार मनप्रीत 2004 में अपने भाई लवप्रीत के साथ आया था। तब उसका दाखिला पिपली के पूजा स्कूल में हुआ था। स्कूल के चेयरमैन विकास दीप संधू ने इन दोनों भाइयों की आर्थिक स्थिति को भांपते हुए स्कूल की फीस माफ की और हॉकी की ओर प्रेरित किया था। उन्होंने बताया कि पिपली से स्टेडियम तक यह दोनों भाई पैदल आते जाते थे। यहां तक की उन्होंने मनप्रीत को कभी किसी बाइक पर भी नहीं देखा, लेकिन खेल प्रेम ने इनके परिवार में जो खुशियां दी, वह इनकी मेहनत का परिणाम है।