आज विजयदशमी है और बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में देश में रावण के पुतले का दहन किया जाता है। यह देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।
लेकिन, इन हजारों की भीड़ में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनका दिल रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों को जलते हुए देखकर रोता है। ये वे लोग हैं, जो महीने भर मेहनत करके इन पुतलों को तैयार करते हैं। ये कलाकार अपनी कला से हजारों लोगों को जोड़ते हैं, दूसरी ओर धार्मिक भाईचारे को भी बढ़ा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से आए मेहताब की उमर करीब 65 वर्ष है। वह पिछले 30 वर्ष से कुरुक्षेत्र में रावण के पुतलों का निर्माण करने के लिए अपने साथियों के साथ आ रहे हैं। मेहताब ने बुधवार को अमर उजाला के साथ हुई बातचीत में कहा कि रावण और उसके परिवार के पुतलों को बनाने का कार्य वह पीढ़ियों से कर रहे हैं। अपने बाप, दादा से उन्होंने यह कला सीखी है।
अब वह अपने चार बच्चों को भी यह काम सिखा चुके हैं। मेहताब ने बताया कि पानीपत में भी उनके ही कारीगर काम में लगे हुए हैं। यहां उनके साथ भूरा और प्रहलाद आए हैं।
दिल तो रोता है, जब लगती है आग
मेहताब ने कहा कि पुतलों को तैयार करने में एक माह से भी ज्यादा समय लगता है। शरीर के हर अंग को पुतलों में बनाया जाता है।
पुतले को एक तरह से बच्चे की तरह खड़ा किया जाता है। यह त्योहार खुशियों का है, लेकिन जब पुतलों में आग लगती है, तो दिल रोने का करता है। आखिर हमारी मेहनत जो धू-धू कर जल रही होती है।
60 फुट का है रावण
शहर के थीम पार्क में होने वाले दशहरा महोत्सव में आज रावण, मेघनाद और कुंभर्ण के पुतलों का दहन किया जाएगा। मेहताब ने बताया कि इस बार रावण 60 फुट, कुंभकर्ण 55 फुट और मेघनाद 50 फुट का है। तीनों पुतलों के निर्माण पर 60 हजार से ज्यादा का खर्च आएगा।