कुरुक्षेत्र। श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय परिसर में हिंदू नववर्ष विक्रम संवत् 2083 को दीपावली की भांति उत्साहपूर्वक मनाया गया। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में रंग-बिरंगी सजावट, फूलों और आकर्षक रंगोलियों के दृश्य नजर आए।
कुलपति कार्यालय, कुलसचिव कार्यालय, प्रशासनिक भवन, आयुर्वेदिक अस्पताल और होम्योपैथी, प्राकृतिक, यूनानी एवं सिद्ध चिकित्सा केंद्रों को सुसज्जित किया गया। शिक्षकों और विद्यार्थियों ने रचनात्मकता और पारंपरिक सौंदर्य का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। इस दौरान विभागों का दौरा करते हुए कुलपति ने सभी विभागों में कलाकृतियां देखी और शिक्षकों तथा विद्यार्थियों का हौसला बढ़ाया। परिसर में व्यवस्था एवं साज-सज्जा जांचने के बाद कुलपति ने कहा कि भारतीय संस्कृति बेहद आकर्षक है। इसके माध्यम से सभी को एक-दूसरे से जुड़ने का मौका मिलता है। हिंदू नववर्ष भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और भारतीय परंपराओं का प्रतीक है।
ऐसे पर्व मूल स्त्रोत का ज्ञान कराकर सकारात्मक ऊर्जा के साथ नए संकल्प लेने की प्रेरणा देते हैं। कुलसचिव प्रो. ब्रिजेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि भारतीय संस्कृति में हर पर्व का विशेष महत्व है। हिंदू नववर्ष नई शुरुआत, अनुशासन और समर्पण के साथ आगे बढ़ने का संदेश देता है। उन्होंने सभी को नववर्ष की शुभकामनाएं दी। उप कुलसचिव विकास शर्मा ने कहा कि हिंदू नववर्ष केवल एक तिथि नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, प्रकृति और जीवन के संतुलन का प्रतीक है। आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य प्रो. आशीष मेहता ने भी विचार रखे। इस अवसर पर डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो.रणधीर सिंह, आयुर्वेदिक अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. राजा सिंगला, प्रो. सीमा रानी, प्रो. सतीश वत्स, प्रो. दीप्ति पराशर, डॉ. नेहा लांबा, प्रो. रविराज, प्रो. रविंद्र, प्रो. आशु, प्रो. अमित कटारिया, प्रो. सचिन शर्मा, प्रो. राजेंद्र सिंह, डॉ. सुधीर मलिक तथा सहायक कुलसचिव राम निवास सहित अन्य शिक्षक एवं कर्मचारी मौजूद रहे। संवाद
कुरुक्षेत्र। आयुष विश्वविद्यालय में दीप जलाकर दी जाती हिंदू नववर्ष की शुभकामनाएं। संवाद- फोटो : samvad
कुरुक्षेत्र। आयुष विश्वविद्यालय में दीप जलाकर दी जाती हिंदू नववर्ष की शुभकामनाएं। संवाद- फोटो : samvad