जिला स्वास्थ्य विभाग को एलएनजेपी अस्पताल में स्थापित आरटी पीसीआर लैब में टेस्टिंग करने की अनुमति मिल गई है, जिसके बाद से स्वास्थ्य विभाग अपनी लैब में टेस्टिंग करने की तैयारियों में जुट गया है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने जिला स्वास्थ्य विभाग की लैब में तैयार की गई सैंपलों की रिपोर्ट की दो बार गुणवत्ता जांच करने के बाद लैब सुचारू रूप से शुरू करने की अनुमति प्रदान की है। अनुमति मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग का आर्थिक बोझ कम होने के साथ-साथ कोविड पॉजिटिव व संदिग्ध मरीजों को काफी राहत मिली है। अब उन्हें कोविड रिपोर्ट की जांच के लिए कई-कई दिन तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। बताया गया कि आगामी एक दो दिन में लैब को सुचारू रूप से चलाया जाएगा, लेकिन लैब टेक्नीशियन की कमी इसे 24 घंटे चलाने में बाधा जरूर बन सकती है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा तीन डाटा एंट्री ऑपरेटर और पांच एलटी को प्रशिक्षण देकर उनकी ड्यूटी लैब में लगाई गई है।
बता दें कि वर्ष 2020 में कोरोना वायरस की दस्तक के बाद से ही जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा आरटी पीसीआर सैंपल जांच के लिए यमुनानगर और करनाल भेजे जा रहे थे। इसकी वजह से स्वास्थ्य विभाग का आर्थिक बोझ तो बढ़ ही रहा था। साथ ही रिपोर्ट का इंतजार में कोविड पॉजिटिव मरीज को उपचार देने में देरी होती थी, लेकिन स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिला अस्पताल में ही आरटी पीसीआर लैब स्थापित की गई है। अब कोविड के संदिग्ध और पॉजिटिव मरीजों को रिपोर्ट के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। यहां स्वास्थ्य विभाग द्वारा पैथोलॉजिस्ट डॉ. विनोद तंवर और अंबाला से डेपुटेशन पर आए विशेषज्ञ डॉ. अनुराग की निगरानी में लैब टेक्नीशियन जांच करेंगे।
उप सिविल सर्जन डॉ. शैलेंद्र खांबरा ने बताया कि तीन डाटा एंट्री ऑपरेटर और पांच एलटी को पहले अंबाला में प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद दो-दो दिन खानपुर मेडिकल कॉलेज में प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद जब जिला अस्पताल में स्थापित लैब में आरटी पीसीआर सैंपलों की जांच की तो 70 फीसदी सैंपलों की गुणवत्ता ठीक पाई गई। इसके बाद फिर एलटी और डाटा एंट्री ऑपरेटर को चंडीगढ़ मेडिकल कॉलेज में तीन दिन का प्रशिक्षण दिया गया। लैब में जांच करने पर अब सैंपलों की रिपोर्ट सौ फीसदी ठीक आई है, जिसके बाद आईसीएमआर ने जिला स्वास्थ्य विभाग को लैब शुरू करने की अनुमति दी है।