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डेंगू से शहर के 50 वर्षीय टेलर मास्टर की मौत, डेंगू की चपेट में खुद स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी

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health - फोटो : Kurukshetra
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कुरुक्षेत्र। डेंगू से शहर के 50 वर्षीय टेलर मास्टर की मौत के अलावा स्वास्थ्य विभाग खुद डेंगू की चपेट में है। डेंगू के प्रभाव को रोकने में असफल जिला स्वास्थ्य विभाग के तीन वरिष्ठ अधिकारियों सहित सिविल सर्जन के चालक और स्टेनो सहित 14 लोग पीड़ित हैं। हैरत की बात यह है कि यह सब होने के बावजूद जिला स्वास्थ्य विभाग गोलमोल जवाब देकर कन्नी काट रहा है। बहरहाल शहर में डेंगू का डंक गहराता जा रहा है। पता चला है कि जिला अस्पताल की मेडिकल ऑफिसर डॉ. दीपाली, सिविल सर्जन के चालक बलवान एवं स्टेनो मलकीत सहित 12 लोग डेंगू की चपेट में आ चुके हैं, जिनकी जिला मलेरिया विभाग ने डेंगू की पुष्टि की है। यही नहीं सिविल अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेंद्र मंढाण एवं रेडियोलॉजिस्ट डॉ. लज्जाराम सहित पांच स्वास्थ्यकर्मी डेंगू से पीड़ित मिले थे, लेकिन जिला मलेरिया नोडल अधिकारी डा. सुदेश सहोता का तर्क है कि उक्त चिकित्सकों ने उनके पास जांच के लिए कोई सैंपल नहीं दिया। जिला अस्पताल में सेवाएं दे रहे चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों के डेंगू की चपेट में आने से अधिकारियों में भी दहशत बनी हुई है। बावजूद इसके जिला मलेरिया विभाग स्थिति कंट्रोल में बता रहा है।
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डेंगू के चलते रही 12 हजार प्लेटलेट्स, चिकित्सकों ने किया था पीजीआई रेफर
कृष्णा नगर गामड़ी निवासी मृतक के पुत्र सचिन ने बताया कि उसके पिता चंद्रप्रकाश को 8 नवंबर से तेज बुखार होना शुरू हुआ था, जिसके बाद से उन्होंने सामान्य उपचार लिया था, लेकिन उन्हें नहीं पता था उनके पिता डेंगू की चपेट में आ चुके हैं। प्लेटलेट्स 12 हजार तक गिरने पर 10 नवंबर को उसके पिता को शहर के एक निजी अस्पताल में दाखिल कराया, जहां से चिकित्सकों ने चंडीगढ़ पीजीआई रेफर कर दिया, लेकिन उन्होंने जीरकपुर स्थित एक निजी अस्पताल में दाखिल कराया। जहां उसके पिता की 12 नवंबर की शाम को उपचार के दौरान मौत हो गई। उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों में उनका आयुष्मान कार्ड नहीं चला।
डेंगू की चपेट में आए केयू के शिक्षक व कर्मचारी
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं कर्मचारी भी डेंगू की चपेट में आ चुके हैं। विश्वविद्यालय के स्वास्थ्य केंद्र में अब तक संदिग्ध डेंगू के चलते तीन प्रोफेसरों सहित आठ कर्मचारी उपचार कराने पहुंचे, जिनमें से दो प्रोफेसरों सहित तीन मरीजों को डेंगू की पुष्टि हुई है। विश्वविद्यालय की पुस्कालय में कार्यरत सुरेंद्र कुमार ने बताया कि सात नवंबर को डेंगू के चलते उनकी प्लेटलेट्स 11 हजार तक पहुंच गई थी। इसके बाद उन्होंने करनाल के कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज से उपचार कराया, जिसके बाद 11 नवंबर को 39 हजार प्लेटलेट्स पहुंच गई, अब उनकी 65 हजार प्लेटलेट्स हैं। उन्होंने कहा कि जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में कोई एंटी लारवा एक्टिविटी नहीं की गई।
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सेप्सिस व सप्टिक शॉक डिजीज के चलते हुई मौत
जिला मलेरिया नोडल अधिकारी डा. सुदेश सहोता ने कहा कि कृष्णा नगर गामड़ी निवासी चंद्रप्रकाश की मौत सेप्सिस व सप्टिक शॉक डिजीज के चलते हुई है। सेप्सिस व सप्टिक शॉक के चलते उसके शरीर में इंफेक्शन फैल गया था, जिसके कारण उसके फेफड़े और लिवर काम करना बंद कर गया था। उन्होंने पुष्टि की है कि चंद्रप्रकाश को डेंगू था, लेकिन नोडल अधिकारी ने डेंगू से चंद्रप्रकाश की मौत होने से साफ इनकार कर दिया है। वहीं रिपोर्ट के अनुसार विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू के चलते चंद्रप्रकाश की प्लेटलेट्स कम हुए, जिसके कारण शरीर में इंफेक्शन होना शुरू हुआ, जिसकी वजह से चंद्रप्रकाश की किड्नी व लिवर ने काम करना बंद किया और अचानक दिल की गति रुकने से उसकी मौत हुई।
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गत वर्ष 18 केसों की पुष्टि, इस बार मात्र 12
-वर्ष 2015 में 192 डेंगू केस
-वर्ष 2015 में 62 डेंगू केस
-वर्ष 2017 में 326 डेंगू केस
-वर्ष 2018 में 18 डेंगू केस
-अब तक 199 संदिग्ध में से 12 लोग डेंगू पीड़ित।
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