फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kurukshetra News: हरियाणा पवेलियन पुरातन संस्कृति को कर रहा जीवंत

विज्ञापन
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव की धर्मनगरी में धूम मची है। ब्रह्मसरोवर तट के चारों ओर लगी स्टॉलों का सामान पर्यटकों को लुभा रहा है। इसके अलावा पुरुषोत्तम बाग के सामने हरियाणा पवेलियन बनाया गया है, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां हरियाणा की लुप्त होती संस्कृति को जीवंत करने का प्रयास किया जा रहा है।
विज्ञापन


पवेलियन में प्राचीन संस्कृति से संबंधित अनेक स्टॉलें लगाई गई है, जहां प्राचीन संस्कृति के दर्शन होते हैं। इनमें मनीहारि, बढ़ई, हरियाणवी खानपान, हरियाणवी वेशभूषा सहित अनेक स्टॉलें शामिल है। यहां ज्योतिसर से आई महिलाएं विभिन्न माध्यम से युवा पीढ़ी को हरियाणा की लुप्त होती संस्कृति से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं। पवेलियन में दर्शनी देवी चरखे से सूत कातती दिखाई दी। उन्होंने बताया कि प्राचीन समय में चरखे से सूत कातकर धागा तैयार किया जाता था। मशीनी युग आने के बाद चरखे का चलन लुप्त हो गया है, जिस कारण युवा पीढ़ी को इसकी जानकारी नहीं है।

ज्योतिसर से कलदेई देवी यहां पत्थर की चक्की पर हाथ से आटा पीस रही है। उन्होंने बताया कि पहले इसी चक्की पर आटा पीसकर रोटी बनाई जाती थी। इससे आटे की गुणवत्ता अच्छी होती थी और हाथ से आटा पीसने से महिलाएं भी स्वस्थ रहती थी। आधुनिक समय में बिजली की चक्की से आटा की पिसाई की जाती है। इस कारण यह चक्की लुप्त होती जा रही है और युवा पीढ़ी इससे अवगत नहीं है। उनका यहां आने का उद्देश्य युवाओं को प्राचीन संस्कृति से अवगत कराना है। इसके साथ ही अंगूरी देवी हाथ से दरी बुनकर हस्तकला को जीवित रखने का प्रयास कर रही है। उनका कहना है कि मशीनें आने से पहले हाथ से ही दरी बुनकर तैयार की जाती थी। इससे उन्हें अपना हुनर दिखाने का मौका मिलता था और लोगों के पास रोजगार का साधन भी होता था लेकिन मशीनें आने के बाद यह कला लुप्त होती जा रही है और रोजगार भी छूट रहा है। वह युवा पीढ़ी को प्राचीन सभ्यता और संस्कृति से जोड़ना चाहती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें