कुरुक्षेत्र। माना जाता है कि जोश व जज्बा हो तो उम्र व शारीरिक कमजोरियां भी जुनून के आड़े नहीं आ सकतीं। धर्मनगरी का ऐसा ही चेहरा है हॉकी कोच सरदार गुरविंद्र सिंह, जो 64 साल की उम्र में भी हॉकी को ही अपनी जिंदगी मानते हैं। भले ही उन्हें हार्ट मरीज होने के चलते पिछले छह माह से सप्ताह में दो दिन डायलिसिस करवानी पड़ती है लेकिन इसके एक घंटे बाद ही वे हॉकी खिलाड़ियों के बीच मैदान में पहुंच जाते हैं। उसी जोश और जुनून के साथ उन्हें तैयार करने लग जाते हैं।
यह उनका जुनून ही है कि वे ओलंपियन सुरेंद्र पालड़ व प्रदीप मौर जैसे हॉकी के सितारे तैयार कर सकें। आज उन्हें गर्व है कि उनके सिखाए गए गुरों से अनेक बाधाओं के बीच सुरेंद्र पालड़ व प्रदीप मोर के अलावा विकास चौधरी, जसवंत सिंह, नवीन सांगवान, विकास शर्मा, युद्धवीर सिंह, नवीन अंतिल व मनप्रीत सिंह सरीखे अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार कर सके। यही नहीं उन्होंने कई राष्ट्रीय खिलाड़ी भी तैयार किए जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र का नाम रोशन किया।
2020 से बिगड़ने लगा स्वास्थ्य, अब हर सप्ताह दो बार डायलिसिस
2021 में सांई से मुख्य कोच के तौर पर सेवानिवृत्त हो चुके गुरविंद्र सिंह बताते हैं कि उनका ब्लड प्रेशर कई साल पहले ही बढ़ने लगा था लेकिन उन्होंने हॉकी के जुनून के आगे ध्यान नहीं दिया। 2020 से स्वास्थ्य बिगड़ने लगा तो कई बार हार्ट अटैक के झटके भी झेले। दोनों किडनी पर भी असर पड़ा तो हर सप्ताह डायलिसिस करवानी पड़ रही है लेकिन वे अस्पताल में एक से डेढ़ घंटे से ज्यादा नहीं रुक पाते और सीधे मैदान में पहुंच जाते हैं। जब तक हॉकी सिख रहे खिलाड़ियों को प्रोत्साहित नहीं कर देते बेचैनी रहती है। उनका सपना यही है कि खिलाड़ी हॉकी में मेजर ध्यानचंद की तरह देश व प्रदेश का नाम रोशन करते रहें।
ट्रिपल ओलंपियन बलबीर सिंह से मिली प्रेरणा
कोच गुरविंद्र सिंह बताते हैं कि उनके पिता पुलिस विभाग में रहते हुए ट्रिपल हॉकी ओलंपियन बलबीर सिंह के रीडर थे। उन्होंने मेरे पिता सरदार अमरीक सिंह को हॉकी के प्रति प्रोत्साहित किया। पिता ने सातवीं कक्षा के दौरान ही हॉकी खेल में भागीदारी करवाना शुरू कर दिया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और हॉकी को अपना जीवन बना लिया। स्कूल स्तर पर बिहार में हुए रूरल राष्ट्रीय खेलों में प्रतिभा दिखाई। इसके बाद पांच साल इंटर यूनिवर्सिटी खेले। खेल न छूट जाए, इसलिए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हॉस्टल में रहने के लिए एमए राजनीतिक विज्ञान की पढ़ाई की। 1982 में रशिया से आई टीम के साथ वे हरियाणा की ओर से शो मैच में खेले। सांई में कोच रहते हुए केंद्र की ओर से गुजरात से लेकर चंडीगढ़, कुरुक्षेत्र व शाहाबाद तक सेवाएं दीं।