कुरुक्षेत्र। मुख्यातिथि को स्मृति चिह्न देते आयोजक। स्वयं
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के फैकल्टी लाउंज में गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहादत शताब्दी के अवसर पर गुरु तेग बहादुर जी की शिक्षाएं व सर्वोच्च बलिदान (हिंद दी चादर : धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की विरासत) विषय पर विस्तार व्याख्यान आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि व विशेषज्ञ वक्ता के रूप में हरियाणा साहित्य और संस्कृति अकादमी पंचकूला के पूर्व उपाध्यक्ष व पूर्व कुलपति प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने कहा कि गुरु तेग बहादुर का 1675 का बलिदान केवल सिख इतिहास की घटना नहीं बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने इसे वैश्विक मानवाधिकार चेतना की आधारशिला बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलसचिव लेफ्टिनेंट प्रो. वीरेंद्र पाल ने की। उन्होंने कहा कि हिंद दी चादर की उपाधि गुरु तेग बहादुर को इसलिए मिली क्योंकि उन्होंने दूसरों के धर्म की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया। डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रो. एआर चौधरी ने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हैं और वर्तमान समय में मानवाधिकारों की चुनौतियों को समझने की प्रेरणा देते हैं। इस मौके पर प्रो. नीरा राघव, विवि ऑडिट के संयुक्त निदेशक सुखमीत सिंह, आरएसए भूपिंद्र सिंह, डॉ. गुरप्रीत सिंह, डॉ. सुरेंद्र वर्मा, डॉ. जितेंद्र जांगडा सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।