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Kurukshetra News: पैकेज<bha>--</bha> प्रकाश उत्सव

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बाबैन। श्री गुरुद्वारा मंढोखरा साहिब पातशाही नौवीं में बाबा सुरेंद्र सिंह के अगुवाई में सिखों के दसवें गुरु गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी का 358 वां प्रकाशोत्सव धूमधाम से मनाया गया। विशाल कीर्तन दरबार का आयोजन किया गया, जिसमें रागी व ढाडी जत्थे द्वारा गुरु की महिमा का गुणगान किया गया। इसके बाद गुरु का लंगर अटूट वरताया गया।
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विशेष तौर पर शिकागो अमेरिका से आए अरमिन्द्र सिंह ने श्री गुरुद्वारा मंढोखरा साहिब पातशाही नौंवी में विशेष सेवा की। बाबा सुरेन्द्र सिंह ने अरमिंद्र सिंह दंपति के अलावा अनेक गणमान्य व्यक्तियों व सेवादारों को सिरोपा भेंट कर उनका सम्मान किया। बाबा सुरेन्द्र सिंह ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह ने हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए मुगल साम्राज्य की दमनकारी नीतियों से अपने दम पर लड़ने की चुनौती को स्वीकार कर मुगलों के छक्के छुड़ा दिए थे। उन्होंने कहा कि गुरु गोबिन्द सिंह ने 1669 में बैसाखी के दिन खालसा पंथ की स्थापना कर मानवता के इतिहास में नया इतिहास रचा था। हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए अपने बेटों सहित पूरे परिवार तक का बलिदान दे दिया था। इस मौके पर तेजिन्द्र पाल सिंह ढिल्लों, सुखजिन्द्र सिंह मशाना, गुरतेज सिंह सेखों, जरनैल सिंह बोढी, हरप्रीत सिंह चीमा, लखविंदर पाल सिंह ग्रेवाल, महेन्द्र सिंह सेखों, सुरजीत सिंह चीमा मौजूद रहे।
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फोटो: 03
गुरुद्वारा फौजी कॉलोनी में रागी जत्थों ने कीर्तन से संगत को निहाल
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। शहीद बाबा जीवन सिंह एवं मजहबी सिख सुधार सभा फौजी कॉलोनी की ओर से गुरुद्वारा फौजी कॉलोनी में गुरु गोबिंद सिंह जी का प्रकाश उत्सव मनाया गया। इस दौरान गुरुद्वारा साहिब में गुरुग्रंथ साहिब जी की हजूरी में बाबा गुलजार सिंह व साध संगत ने अरदास की। इस दौरान रागी जत्थों ने कीर्तन से संगत को निहाल किया।
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हिन्दू सिख एकता के प्रतीक बजरंगी सरदार कुलवंत सिंह भट्टी ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी सिखों के दसवें सिख गुरु होने के साथ साथ एक योद्धा, कवि और दार्शनिक थे। ये सिखों के नौवे सिख गुरु तेग बहादुर के पुत्र थे जिनकी हत्या सम्राट औरंगजेब द्वारा कर दी गई थी। अपने पिता की मृत्यु के बाद मात्र नौ साल में उन्हें सिख धर्म का दसवां एवं अंतिम गुरु बनाया गया था। साल 1699 की सभा में, गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा वाणी की स्थापना की वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह। गुरु गोबिंद के जीवनकाल में चार पुत्र हुए थे जिनमें से दो की युद्ध में मौत हो गई थी और बाकी दो पुत्रों को मुगल सेना ने मार दिया था। भट्टी ने संगत से आह्वान किया कि आज हम सबको संकल्प लेना चाहिए और अपने देश व समाज में अच्छे कार्य करें। इस अवसर पर संगत को प्रसाद वितरित किया गया। इस मौके पर सभा के प्रधान संजीव सिंह सन्नी, उप प्रधान गुरचरण सिंह, महामंत्री कुलवंत सिंह भट्टी, सह सचिव सुरेंद्र छिंदा, कैशियर लखविंद्र सिंह लक्खा, संरक्षक सुखविंद्र सिंह व अन्य साध संगत ने सेवा की।

फोटो: 21

एनएसएस शिविर में मनाई गुरु गोबिंद सिंह जयंती
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में चल रहे सात दिवसीय राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के पांचवें दिन स्वयं सेविकाओं ने गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती के उपलक्ष्य में कई सांस्कृतिक गतिविधियों की प्रस्तुति दी। इस अवसर पर शिक्षकों ने छात्राओं को गुरु गोविंद सिंह जी के जीवन से जुड़े प्रसंगों के बारे में बताया । वहीं छात्राओं ने गीतों के साथ गुरु गोविंद सिंह जी की शहादत पर पर कविता पाठ भी किया। शिविर में मुख्य वक्ता के तौर पर कवि वीरेंद्र चौहानने शिरकत की। उन्होंने स्वयं सेविकाओं को गुरु गोविंद जी से शिक्षा लेते हुए देश की सेवा के लिए प्रेरित किया। तीसरे सत्र में प्राध्यापिका सुखविंदर ने बच्चों को गुरु गोविंद सिंह जी की जीवन से जुड़ी कई रोचक बातें बताई ।
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