कुरुक्षेत्र। राष्ट्रीय गुर्जर धर्मशाला में कुरुक्षेत्र और कैथल के पदाधिकारियों के आह्वान पर मंगलवार को समाज की महापंचायत हुई। अध्यक्षता कुरुक्षेत्र धर्मशाला के प्रधान ऋषिपाल कसाना ने की। इस दौरान शादी विवाह मृत्यु उपरांत की जाने वाली रस्मों में फैली सामाजिक कुरीतियों, बच्चों में नशे की लत, सोशल मीडिया पर गलत किस्म के कटेंट डालने से रोकने और शिक्षा के प्रचार-प्रसार बारे विमर्श बैठक की गई।
प्रधान ने कहा कि बैठक में निर्णय को लागू करने के लिए गांव स्तर पर क्रियान्वयन समितियां बनाई जाएंगी। पूरे क्षेत्र के लिए लोगों और धर्मशालाओं के पदाधिकारियों सहित बड़ी कॉमन क्रियान्वयन समिति का गठन होगा। इस अवसर पर राव सुरेंद्र सिंह, लीलाराम गुर्जर, सुरेश तंवर, अशोक गुर्जर, रामचंद्र गुर्जर, अनिल तंवर, अजमेर सिंह, ज्ञानसिंह एडवोकेट, नरेश आर्य, ओमप्रकाश राठी, राजपाल तंवर, मुनीष कठवाड़, चंद्रभान दयोहरा आदि पदाधिकारियों सहित कार्यकारिणी, पार्षद, ब्लॉक समिति सदस्यों सहित अन्य मौजूद रहे।
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इन बिंदुओं पर चर्चा कर लिया निर्णय
दहेज रहित शादी करने वाले परिवारों को सम्मानित करने, लड़के की शादी में शगुन न लेने, शादी में सार्वजनिक स्थान पर डीजे न बजाने, रात को घर में 10 बजे तक और कम आवाज में डीजे बजाने, भात के लिए सीमित यानी परिवार के 11 सदस्य तक, बारात में अधिकतम संख्या 51, बारात दिन में 11 बजे तक, रात में सात बजे तक लड़की पक्ष के घर या शादी स्थल पर पहुंचने, रिंग सेरेमनी जैसे कार्यक्रम न करने, शादी में मिलनी शगुन 100 रुपये तक, शादी में चिट्ठी या सगाई शादी से कुछ दिन पहले करने, शादी समारोह में शराब का स्टाल न लगाने का निर्णय लिया। बच्चों में नशा रोकने और नशीली सामग्री बेचने वालों पर संस्था के सहयोग से गांव स्तर पर कार्रवाई, लड़कियों को सोशल मीडिया दुष्प्रभावों के प्रति जागरुक करने, माता पिता से बच्चों पर ध्यान रखने की अपील, शिक्षा के प्रति प्रेरणा, परिवार में शादी, जन्मदिन, दसूठन और विदेश जाने पर आतिशबाजी रोकने, खुशी के मौके पर किन्नर समाज के व्यक्ति को घर आने पर 1100 रुपये देने का भी निर्णय लिया गया।
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मृत्यु के बाद की रस्म
मृत्यु भोज में आए रिश्तेदारों को दाल रोटी देने, बुजुर्ग की मृत्यु रस्म पर शक्कर देने, अस्थि रस्म का समय गर्मियों में सुबह आठ बजे और सर्दियों में नौ बजे तक, रिश्तेदारों को छोड़ अन्य को भोजन न देने, पगड़ी का समय दिन में एक तक, इसी दिन शोक प्रकट करने की बात रखी गई।