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राष्ट्रपति भवन से दोनों बार फोन तब आया जब देवव्रत रोहतक कालेज में भाषण दे रहे थे...

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गुरुकुल कुरुक्षेत्र के संक्षरक एंव हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत । - फोटो : Kurukshetra
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राजेश शांडिल्य
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कुरुक्षेत्र। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने बताया कि उनके लिए रोहतक बहुत महत्वपूर्ण रहा है। पिछली बार जब वो हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल बनाए गए थे, उस दौरान भी रोहतक में एक कार्यक्रम में थे। अब सोमवार को एक बार फिर जब वो रोहतक के हिंदु कॉलेज में एक कार्यक्रम में आए थे, उसी दौरान राष्ट्रपति भवन से गुजरात का राज्यपाल बनाए जाने का संदेश मिला।
उन्होंने ये खुलासा अमर उजाला के साथ विशेष बातचीत में किया। आचार्य देवव्रत ने बताया कि 8 अगस्त 2015 को जब पहली बार राज्यपाल बनने की सूचना राष्ट्रपति भवन से मिली थी,तब वह रोहतक के आर्य कन्या कालेज में संबोधित कर रहे थे। इस बीच राष्ट्रपति भवन से लगातार उनके मोबाइल फोन की घंटी बजती रही और उन्होंने अपना संबोधन जारी रखा। संबोधन पूरा होने के उपरांत जब उन्होंने काल रिसीव की तो उन्हें हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल बनने की सूचना मिली। इसी प्रकार सोमवार को जब वह रोहतक के हिंदु कॉलेज में अपना व्याख्यान दे रहे थे, तभी उनको गुजरात का राज्यपाल बनाने की सूचना मिली। आचार्य देवव्रत ने बताया कि जीरो बजट प्राकृतिक खेती एवं गोसंवर्धन की दिशा में अपने अभियान को वो गुजरात में भी चलाएंगे। इसके अलावा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और स्वच्छता अभियान की दिशा में उनकी मुहिम जारी रहेगी।
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पीएम के गृहराज्य में राज्यपाल होंगे आचार्य
देश के नौ प्रदेशों में राज्यपालों का कार्यकाल पूरा हो रहा है। सोमवार को हिमाचल के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को गुजरात का राज्यपाल बनाने और उनकी जगह कलराज मिश्र को हिमाचल राज्यपाल बनाने की दिशा में ही पहली सूचना है। शिक्षक से राज्यपाल और अब मोदी के गृहराज्य में राज्यपाल बनकर जाने से आचार्य का कद और बढ़ा है। माना जाता है कि आचार्य के जीरो बजट प्राकृतिक खेती और गोसंवर्धन के अभियान के चलते वे पीएम मोदी उनकी कई बार सराहना कर चुके है।
गुजरात का हरियाणा कनेक्शन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दशक पहले हरियाणा में भाजपा के प्रभारी रहे हैं। अब दो दशक बाद हरियाणा का बेटा गुजरात में राज्यपाल बन कर जाएगा। इस घोषणा के बाद आचार्य के साथ साथ परिवार और उनके शुभचिंतकों को बधाइयां देने वालों का तांता लगा हुआ है। देर शाम कुरुक्षेत्र गुरुकुल पहुंचने पर यहां के ब्रह्मचारियों और स्टाफ ने उनका भव्य स्वागत किया।
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कई आंदोलनों में सक्रिय रहे आचार्य
आचार्य देवव्रत का जन्म 18 जनवरी 1959 को पानीपत के समालखा कसबे के पावटी गांव में हुआ था। हालांकि पिछले चार दशकों से उनका घर कुरुक्षेत्र में है और वे लंबे समय तक कुरुक्षेत्र गुरुकुल के प्राचार्य रहे हैं। जीरो बजट खेती, गोसंवर्धन और आर्य समाज की गतिविधियों के अलावा भारतीय किसान संघ के कई आंदोलनों में सक्रिय भी रह चुके हैं। हालांकि इन उनकी बड़ी भूमिका 13 अप्रैल 1913 को स्वामी श्रद्धानंदजी द्वारा स्थापित कुरुक्षेत्र गुरुकुल को बुलंदियों तक पहुंचाने में रही है।
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