कुरुक्षेत्र। हिमालय के पहाड़ों पर पाई जाने वाली मशरूम गुच्छी अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रही है।
औषधीय गुणों से भरपूर गुच्छी की कीमत लोगों के लिए कौतुहल बनी है। महोत्सव में जम्मू-कश्मीर से आई गुच्छी 35 हजार रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक रही है। यह जम्मू-कशमीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचे पर्वतीय इलाकों में मिलती है।
गुच्छी का 90 प्रतिशत निर्यात जापान और थाईलैंड में औषधीय गुणों के लिए किया जाता है। इसमें प्राकृतिक रूप से ऊर्जा देने वाले गुण होते हैं।
दुकानदार फरहान व मुमताज ने बताया कि गुच्छी की सबसे अनोखी बात यह है कि इसकी खेती नहीं की जा सकती।
गुच्छी एक दुर्लभ और महंगी मशरूम है, जो ऊंचे पहाड़ी इलाके के घने जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगती है। जंगलों के अंधाधुंध कटान के कारण यह अब काफी कम मात्रा में मिलती है। इसका सेवन सब्जी के रूप में किया जाता है।
गुच्छी के औषधीय गुण : श्रीकृष्णा आयुष विश्वविद्यालय के प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. चक्रपाणि आर्य का कहना है कि गुच्छी के कई औषधीय गुण हैं। यह हृदय के लिए फायदेमंद है। अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाकर खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करती है। हड्डियों को मजबूत बनाती है। गुच्छी मशरूम में 32.7 प्रतिशत प्रोटीन, 2 प्रतिशत फैट, 17.6 प्रतिशत फाइबर, 38 प्रतिशत कार्बोहायड्रेट पाया जाता है।
इसमें विटामिन डी, विटामिन बी व आयरन जैसे पोषक तत्व भरपूर होते हैं। इसके सेवन से पेट संबंधी बीमारियां ठीक होती है। गुच्छी में ऐसे यौगिक होते है जो ट्यूमर को बनने से रोकते हैं।