भगवान श्रीकृष्ण की कर्मस्थली कुरुक्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जी किशन रेड्डी ने शंखनाद और मंत्रोच्चार के बीच सन्निहित सरोवर पर पूजा अर्चना करके ब्रह्मसरोवर के पावन तट पर दीपदान किया। इस दीपदान के साथ ही परंपरा अनुसार महोत्सव भी संपन्न हुआ। इस महाआरती की संध्या में दीपोत्सव मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा। इस दीपोत्सव में जहां सन्निहित सरोवर और ब्रह्मसरोवर के पावन तट पर लाखों दीपक जलाए गए। कुरुक्षेत्र और 48 कोस के 75 तीर्थ स्थल भी दीपों की रोशनी से जगमग हुए। समापन समारोह पर दीपोत्सव का यह दृश्य अद्भुत और मनमोहक रहा। पुरुषोत्तमपुरा बाग ब्रह्मसरोवर पर राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जी किशन रेड्डी, सांसद नायब सिंह सैनी, भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ ने मंत्रोच्चार के बीच विराट महाआरती में भाग लेकर दीपदान भी किया। इस आरती का मंत्र उच्चारण बलराम गौतम ने करवाया। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में गीता और ब्रह्मसरोवर आरती से पहले पवित्र ग्रंथ गीता के श्लोक का उच्चारण शुरू हो गया था। इस श्लोकोच्चारण से धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र की पूरी फिजा गीता मय हो गई। इसके साथ ही विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से लाखों दीपकों को रोशन किया गया। इन दीपों की रोशनी से ब्रह्मसरोवर का पूरा तट जगमगा उठा और एक मनमोहक दृश्य नजर आया। राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने प्रदेशवासियों को दीपोत्सव और जयंती समारोह की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र में गीता जयंती का यह समारोह दीपोत्सव के कारण अद्भुत रहा और लाखों दीपों की दीपमाला से ब्रह्मसरोवर ही नहीं कुरुक्षेत्र का दृश्य अद्भुत नजर आया।
पहली बार सन्निहित सरोवर पहुंचे मुख्य अतिथि
महोत्सव में पहली बार सन्निहित सरोवर पर मुख्य अतिथि और अन्य मेहमान पहुंचे और पूजा-अर्चना के साथ दीपदान किया। यहां पर श्री ब्राहमणों तीर्थोद्धार सभा और शहर की सभी संस्थाओं ने मेहमानों का जोरदार स्वागत किया। इस मौके पर विधायक सुभाष सुधा, केडीबी के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा, सीईओ केडीबी अनुभव मेहता सहित अन्य ने भी महाआरती में भाग लिया।
दीपोत्सव में रंग-बिरंगे हिंडोले बने आकर्षण का केंद्र
महोत्सव के समापन समारोह पर सांध्यकालीन आरती के तुरंत बाद ब्रह्मसरोवर के तट से रंग-बिरंगे हिंडोले हवा में छोड़े गए। इन हिंडोले से निकलने वाली रोशनी ने ब्रह्मसरोवर की फ़िजा को रंगीन कर दिया। यह दीपोत्सव में आकर्षण का केंद्र बने।