अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव का शिल्प और सरस मेला रविवार को शिल्पकला और संस्कृति के संगम के साथ संपन्न हुआ। मेले के अंतिम दिन भी पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ी और उन्होंने मेले में जमकर खरीददारी भी की। मेले के समापन के साथ ही कुछ शिल्पकार अगले वर्ष इसी समारोह में फिर से मिलने के वादे के साथ देर सायं को रवाना हो गए तो कुछ ने सोमवार सुबह जाने के लिए तैयारी की। अब वर्ष 2017 में होने वाले समारोह पर शिल्पकारों से लेकर कलाकारों व पर्यटकों की नजरें टिक गई है। ब्रह्मसरोवर तट पर पहली बार मनाया गया अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती समारोह यहां पहुंचे शिल्पकारों, कलाकारों व पर्यटकों के साथ-साथ नगर वासियों के लिए यादगार साबित होगा तो वहीं समारोह ने इस बार कई रिकार्ड भी बनाए।
शिल्पकारों का कहना है कि अन्य महोत्सवों व मेलों से ज्यादा गीता जयंती महोत्सव में उनकी कला के कद्रदान पहुंचते हैं और पूरे उत्साह के साथ शिल्प की खरीददारी करते हैं। जयपुर से पहुंची पेंटिंग कलाकार वर्षा का कहना है कि कपड़े की मखमली पेंटिंग को पर्यटकों ने खूब पसंद किया है। अगली बार वे गीता जयंती महोत्सव में धर्मनगरी के पर्यटन स्थलों की पेंटिंग लेकर पहुंचेंगी।
यहां पर्यटक गीता जयंती पर धार्मिकता से जुड़ी पेंटिंग को खरीदने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाते हैं। पश्चिम बंगाल से पहुंचे मूर्तिकार श्यामजी घोस ने बताया कि वे पिछले 8 सालों से मेले में सोलावुड की लकड़ी से बनी मां दुर्गा की मूर्तियां लेकर पहुंच रहे हैं। इस बार अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव पर विदेशी पर्यटकों ने भी मूर्तियों को खरीदने में पूरा उत्साह दिखाया।
पीतल की श्रीमद्भागवत गीता लेकर पहुंचेंगे चौरसिया
उत्तरप्रदेश के अलीगढ़ से पीतल की मूर्तियां लेकर पहुंचे दलीप चौरसिया ने बताया कि गीता जयंती महोत्सव में पीतल की मूर्तियों की पर्यटकों ने जमकर खरीददारी की। अगले वर्ष आयोजित होने वाले गीता जयंती समारोह में वे पीतल की श्रीमद्भागवत गीता लेकर पहुंचेंगे। इसमें गीता के 18 श्लोक अंकित होंगे।
विदेशों में भी है पसमीना शाल की डिमांड
महोत्सव में कश्मीर से आए शिल्पकार फिरोज अहमद का कहना है कि विदेशों में भी पसमीना शाल की अच्छी डिमांड है। इस बार आस्ट्रिया, इंडोनेशिया, कनाडा व जापान से विदेशी पर्यटक व कलाकार महोत्सव में पहुंचे। उन्होंने पसमीना शाल की कास्तकारी की तारीफ की और खरदीदारी में भी दिलचस्पी दिखाई। उन्होंने बताया कि देश के हर हिस्से में पसमीना शाल के कद्रदान है। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक लगने वाले प्रांतीय मेलों में पसमीना शाल अच्छी मांग रहती है। उन्होंने बताया कि गीता जयंती समारोह में पिछले 6 सालों से लगातार आ रहे हैं, लेकिन इस बार का अंतरराष्ट्रीय महोत्सव में पर्यटकों के उत्साह सबसे ज्यादा रहा हैं। प्रशासन की तरफ से सुरक्षा, खाने-पीने और रहने के प्रबंध सबसे अच्छे किए गय थे।
पश्चिम बंगाल का कॉटन सिल्क भी पर्यटकों को खूब भाया
गीता जयंती महोत्सव में पश्चिम बंगाल से आए आलोक कुमार जना का कहना है कि इस महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आंनद लेने के साथ-साथ लोगों ने पश्चिम बंगाल का कॉटन सिल्क खूब पसंद किया।
पर्यटकों को पसंद आई जैमस्टोन पेंटिंग
जयपुर के मोहन लाल सैनी प्राकृतिक राशि नगों के चूरे से पेंटिंग बनाने के लिए मशहूर है। प्रदर्शनी में उनकी जैमस्टोन पेंटिंग लोगों द्वारा खूब पसंद की गई। उनकी पेंटिंग की कीमत 100 रुपये से शुरू है और 5 हजार रुपये तक की पेंटिंग भी लोगों द्वारा खरीदी गई। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा बनाई गई की-रिंग डायरी महोत्सव में पहुंचने वाले पर्यटकों को खूब भायी।
खादी की मोदी जैकेट बिकी हाथोंहाथ
खादी ग्रामोद्योग मंडल कुरुक्षेत्र के लिए अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव खास रहा हैं। इस खादी की स्टाल पर मोदी जैकेट को लोगों ने खूब पसंद किया। खादी ग्रामोद्योग मंडल के मैनेजर सतपाल सैनी ने बताया कि यह महोत्सव खादी वस्त्रों के लिए खास रहा हैं। इस बार लोगों ने खादी वस्त्र खूब खरीदे हैं। इस बार पर्यटकों के लिए मोदी जैकेट, महिला कोट व डब्बी जैकेट विशेष रुप से तैयार करके लाएं थे और लोगों ने इन जैकेटों को सबसे ज्यादा पसंद किया।
वुडन लुक के टेराकोटा पोट भी खूब बिके
चंडीगढ़ से मामचंद मेले में वुडन लुक वाले टेराकोटा पोट लेकर लेकर आए जिसे लोगों ने जमकर खरीदा। इन टेराकोटा पोट पर हस्तशिल्प कला ने पर्यटकों को आकर्षित किया। पोट की इस खासियत ने ही पर्यटकों को अपनी तरफ खींचा। मामंचद का कहना है कि टेरोकोटा पोट तो बहुत शिल्पी बनाते है, लेकिन उनके द्वारा बनाए गए पोट वुडन लुक होने के चलते सबसे अलग थे। खासतौर पर यह घर के इंटिरियर से मेल खाते हैं।