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गीता जीवन का आधार, ध्यान-साधना भारत का गौरव : स्वामी ज्ञानानंद

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कुरुक्षेत्र। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता जीवन का आधार है और ध्यान-साधना भारतीय संस्कृति का गौरव है। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता के माध्यम से कर्म का संदेश दिया, जबकि भारतीय ऋषि-मुनियों ने योग, साधना और समाधि के द्वारा विश्व को मानसिक शांति और एकाग्रता का मार्ग दिखाया। यह भारत के लिए गर्व की बात है कि यूनेस्को ने 21 जून को विश्व योग दिवस और 21 दिसंबर को विश्व ध्यान दिवस के रूप में मान्यता दी है।
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स्वामी ज्ञानानंद रविवार को जीओ गीता संस्थानम में गीता अध्ययन एवं शोध केंद्र के तत्वावधान में आयोजित गीता प्रवाह संगोष्ठी एवं ध्यान-साधना सत्र को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा मुख्यातिथि रहे, जबकि एनआईटी के निदेशक प्रो. बीवी रमण रेड्डी और आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति वैद्य करतार धीमान विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। जीओ गीता सचिव एवं संगोष्ठी संयोजक मदन मोहन छाबड़ा ने अतिथियों का शॉल भेंट कर सम्मान किया।
स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि गीता का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। ध्यान-साधना से मानसिक शांति मिलती है और नई ऊर्जा का संचार होता है, जिससे व्यक्ति सकारात्मक कार्यों की ओर अग्रसर होता है। उन्होंने कहा कि भारत को विश्व गुरु बनाने में गीता और ध्यान-साधना की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
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कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि गीता जीवन जीने की कला सिखाती है और इसमें हर समस्या का समाधान निहित है। वैद्य करतार धीमान ने गीता को व्यवहार में उतारने पर बल दिया। इस अवसर पर रणबीर सिंह, शुचिसुमिता, आरके देशवाल, डॉ. ऋषिपाल सहित बड़ी संख्या में गीता प्रेमी उपस्थित रहे।
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