कुरुक्षेत्र। हिम्मत, हौसला और कुछ करने की जिद्द हो तो विपरीत हालात भी आड़े नहीं आ सकते और मुकाम हासिल किया जा सकता है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है लखनऊ की रहने वाली गजाला नाहिद ने, जो न केवल खुद बल्कि विभिन्न राज्यों की 500 महिलाओं को संबल बना चुकी है। गजाला व उनके साथ जुड़ी अनेक महिलाओं की मेहनत व सपनों को अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव जैसे आयोजन पंख लगा रहे हैं।
अपनी खास चिकन लखनवी कारीगरी लेकर महोत्सव में पहुंची गजाला बेहद उत्साहित हैं और उन्हें हर बार की तरह इस बार भी बेहतर कारोबार की उम्मीद है। विशेष तौर पर महिलाओं के पहने जाने वाले कपड़ों पर की जाने वाली इस कारीगरी के मुरीद उन्हें देश के हर राज्य में मिल जाते हैं। यहां भी उनकी कारीगरी की जमकर सराहना की जा रही है।
पति की प्राइवेट नौकरी से काम चलना हो गया था मुश्किल
एमए तक पढ़ाई कर चुकी गजाला बताती है कि वह पीएचडी तक करना चाहती थी लेकिन पारिवारिक परिस्थिति के चलते उन्हें पढ़ाई छोड़नी पड़ी। बहराईच में रहने वाले माता-पिता ने लखनऊ के डालीगंज में शमीम अहमद से शादी की। पति प्राइवेट नौकरी करते थे लेकिन उनका वेतन बेहद कम था जिससे परिवार का गुजारा चलाना मुश्किल हो रहा था। उन्होंने नौकरी करनी चाही तो ससुरालजनों ने इन्कार कर दिया। इसके बाद उन्होंने कपड़े पर चिकन लखनवी कारीगरी शुरू की। पहले खुद सीखा तो फिर धीरे-धीरे काम करने लगी। सेंटर बनाया तो दूसरी महिलाएं भी अपने साथ जोड़ी। आजाद महिला विकास सेवा संस्था भी बना ली जिसके साथ आज लखनऊ व उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों के साथ-साथ आसपास के अन्य राज्यों से भी 500 महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जो इसी कारीगरी के जरिये खुद के रोजगार पर खड़ी हैं।
मिल चुका स्टेट अवार्ड, अखिलेश यादव रह गए थे दंग
जलाला बताती है कि उनकी कारीगरी को उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2015-16 में स्टेट अवार्ड दिया। तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, उत्तर प्रदेश के कपड़ा मंत्री भगवत शरण ग्रोवर ने भी उनकी कारीगरी को देख दंग रह गए थे। उन्होंने उन्हें सम्मानित भी किया। यहां गीता महोत्सव में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी की पत्नी सुमन सैनी भी उनकी कारीगरी को देख हैरान रह गई। जलाला बताती हैं कि उन्हें आज संतोष है कि वह अपने साथ दूसरी महिलाओं को भी खुद के रोजगार पर खड़ा कर सकी है। उनके पास महिलाओं के कुर्ता पायजामा से लेकर लहंगा चुन्नी तक हर आइटम इस कारीगरी के साथ मौजूद हैं जिनकी कीमत 500 रुपये से लेकर 15000 रुपये तक है। एक आइटम को बनाने में कम से कम एक सप्ताह लग जाता है। वे यहां गीता महोत्सव में करीब 12 साल से आ रही हैं।
कुरुक्षेत्र। शिल्प मेले में अपनी कारीगरी से तैयार कपड़े दिखाती गजाला नाहिद। संवाद
कुरुक्षेत्र। शिल्प मेले में अपनी कारीगरी से तैयार कपड़े दिखाती गजाला नाहिद। संवाद
कुरुक्षेत्र। शिल्प मेले में अपनी कारीगरी से तैयार कपड़े दिखाती गजाला नाहिद। संवाद