संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी की ओर से आयोजित गीता महोत्सव के अंतर्गत पुस्तक मेले के साहित्य मंच पर शनिवार का दिन भक्ति-रस और आध्यात्मिक माधुर्य से ओतप्रोत रहा। गीता के पावन श्लोकों और भजनों के साथ दिन की शुरुआत ऐसी हुई।
कार्यक्रम का केंद्र बिंदु रही साधु राम भजन मंडली की प्रस्तुति, जिसने अपने सुरों की साधना और अनुशासित लय से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। मंडली के गायकों की ओर से गाए गए गीता-भजनों की मधुर ध्वनि जैसे ही वातावरण में गूंजी, ब्रह्मसरोवर का तट आध्यात्मिकता के उजास से स्नात दिखाई देने लगा। सुबह की सुनहरी किरणें जब जल पर प्रतिबिंबित हो रही थीं, तभी भजनों की धीमी-धीमी तरंगें पानी की लहरों के साथ दूर तक बहती महसूस हो रही थी, मानो प्रकृति स्वयं इस दिव्य संगीतमय साधना में सहभागी बन गई हो।
वाद्य यंत्रों की कोमल संगत और गीता श्लोक की दार्शनिक गूंज ने पवित्र ब्रह्म सरोवर के परिवेश को और भी भक्तिमय में बना दिया। दर्शकों के लिए यह केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभूति बन गईं। कई लोग आंखें बंद कर मंत्र ध्वनि में डूबे रहे, तो कई के चेहरे पर ऐसी आत्मिक शांति झलक रही थी, मानो मन किसी अदृश्य स्पर्श से पावन हो उठा हो।
गीता पुस्तक मेले के नोडल अधिकारी डॉ. चितरंजन दयाल सिंह कौशल ने बताया कि गीता की शिक्षाएं केवल पठन सामग्री नहीं, बल्कि जीवन को प्रकाशमान करने वाली दिव्य ज्योति हैं और साहित्य मंच पर गूंजते भजन इसी प्रकाश को जन-मन तक पहुंचाने का माध्यम बने हुए हैं। आने वाले दिनों में इसी भावभूमि को और विस्तार देने वाले कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।