कुरुक्षेत्र। भारतीय परपंराओं एवं संस्कारों का मानव जीवन में विशेष महत्व है। इन्हीं में ज्येष्ठ महीने की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा का पावन पर्व बड़े हर्षोल्लास से मनाया जाता है।
अखिल भारतीय श्री मारकंडेश्वर जनसेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत जगन्नाथ पुरी ने बताया कि ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी को मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। उन्होंने राजा भगीरथ के पूर्वजों का उद्धार किया, जिससे उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। इस दिन को हम गंगावतरण के नाम से भी जानते हैं। गंगा दशहरा के दिन गंगा नदी अथवा तीर्थ में स्नान करना बेहद शुभ माना जाता है। गंगा स्नान से पापों से मुक्ति मिलती है।
मान्यता है कि इसी दिन रामेश्वरम में भगवान श्रीराम ने शिवलिंग की स्थापना की थी। इस दिन मां गंगा की पूजा करने से पापों से मुक्ति मिलती है और मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। महंत जगन्नाथ पुरी ने बताया कि गंगा दशहरा पांच जून को मनाया जा रहा है। महंत जगन्नाथ पुरी ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मां गंगा का अवतरण ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को हस्त नक्षत्र में हुआ था। माना जाता है भागीरथ अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए धरती पर गंगा को लाना चाहते थे। क्योंकि एक श्राप के कारण केवल मां गंगा ही उनका उद्धार पर सकती थी। जिसके लिए उन्होंने मां गंगा की कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा ने दर्शन दिए और भागीरथ ने उन से धरती पर आने की प्रार्थना की। इस अवसर पर स्वामी संतोषानंद, स्वामी गोविंद महाराज, आचार्य अरुण प्रसाद, आकाश पुरी व बिल्लू पुजारी इत्यादि मौजूद रहे।