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प्रदूषण से समाधान तक : पराली से बन रहीं उपयोगी वस्तुएं

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कुरुक्षेत्र। पराली से बनी सजावटी वस्तुएं। संवाद - फोटो : 1
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कुरुक्षेत्र। पराली को जलाने से रोकने के लिए सरकार की ओर से कड़ी निगरानी और कार्रवाई की जाती रही है, ताकि प्रदूषण की समस्या का समाधान किया जा सके। लेकिन अब यह पराली नए अवसरों का स्रोत बन चुकी है। वैज्ञानिक शोध और सरकारी पहल ने इसी पराली को ऊर्जा, रोजगार और नवाचार का आधार बना दिया है।
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इथेनॉल निर्माण से लेकर दैनिक उपयोग की वस्तुओं के निर्माण तक पराली ने संभावनाओं के नए द्वार खोले हैं। राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान, भोपाल की पहल से प्रशिक्षित स्वयं सहायता समूह की 50 से अधिक महिलाएं इससे उपयोगी उत्पाद बनाकर न केवल आत्मनिर्भर हो रही हैं बल्कि प्रदेश के आर्थिक विकास में भी योगदान दे रही हैं। राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान भोपाल को पराली से उत्पाद बनाने के लिए लोगों को प्रशिक्षित करने का जिम्मा सौंपा गया है।
कृषि व किसान कल्याण विभाग के जींद जिले के दालमवाला गांव स्थित प्रशिक्षण केंद्र में विभाग महिलाओं को उपहार के रूप में देने वाले बुके, सजावट में प्रयोग होने वाली पेरी लाइटें, कोरचर, पेन स्टेंड, लैंप लाइट, लेडिज बैग, क्राफ्ट पेपर, चपाती बॉक्स आदी वस्तुओं को पराली का प्रयोग करके बनाना सिखाया जा रहा है। इन वस्तुओं में से पांच वस्तुएं बाजार में बिकने के लिए तैयार हो चुकी हैं और बाकी वस्तुओं पर जल्द ही काम पूरा कर लिया जाएगा।
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फाउंडेशन फॉर डवलपमेंट साहिल शर्मा बताते हैं कि उनका एनजीओ महिलाओं को पराली से वस्तुएं बनाने के लिए प्रेरित कर रहा है व महिलाओं को प्रोजेक्ट समृद्धि से जोड़ने के साथ महिलाओं की ओर से बनाई वस्तुओं के लिए बाजार से ग्राहक खोजकर ला रहा है। पांच वस्तुएं, जो उन्होंने ब्रिकी के लिए चुनी हैं, उन्हें कॉरपोरेट जगत में तेजी से पसंद किया जा रहा है।

कुरुक्षेत्र। पराली से बनी सजावटी वस्तुएं। संवाद- फोटो : 1

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