बुढ़ापा पेंशन में हुए फर्जीवाड़े के खेल धीरे-धीरे सामने आने लगे हैं। कई वर्षों से फर्जी तरीके से पेंशन ले रहे लोगों को विभाग नोटिस जारी करने लगा है। इसका खुलासा बैंकों में पेंशनधारकों के खाते खुलने के बाद सामने आया है। इसके बाद विभाग के निशाने पर पूर्व सरपंच आ गए हैं। इसके साथ ही विभाग ने ईपीएफ धारकों से लेकर पूर्व सैनिकों की फाइलें तक खंगालनी शुरू कर दी हैं।
सख्ती होने के साथ ही विभाग को प्रति माह लाखों रुपये की रिकवरी होने लगी है। दोषियों पर भी धड़ाधड़ केस दर्ज कराए जा रहे हैं। समाज कल्याण विभाग की बुढ़ापा पेंशन में चल रही गड़बड़ी के खेल को रोकने के लिए सरकार ने समाज कल्याण विभाग को कंप्यूटराइज्ड करने के साथ ही सभी की पेंशन बैंक खातों में देने के आदेश दिए थे। खाते खुलवाने की सीमा पिछले माह तक थी।
आदेश का पालन करते हुए जिला समाज कल्याण ने लगभग 98 फीसदी पेंशन धारकों के खाते खुलवा दिए हैं। बैंक खाते खोलते समय मांगी गई जानकारी से फर्जी तरीके से पेंशन ले रहे लोगों के उड़ गए। इसके साथ ही इन खातों को आधार नंबर से लिंक करते ही फर्जीवाड़ा सामने आ गया। यह देख सकते में आए विभाग ने पूर्व सैनिकों से लेकर ईपीएफ लेने वाले, बुढ़ापा पेंशन धारकों की फाइलें खंगालनी शुरू कर दी हैं।
पेंशन घोटाले में विभाग कई पूर्व सरपंचों के खिलाफ केस दर्ज करवा चुका है, जबकि बहुत से सरपंचों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी है। इस सख्ती का ही नतीजा है कि विभाग को प्रतिमाह लगभग 20 लाख रुपये तक की रिकवरी प्राप्त हो रही है।
एक और मामला पहुंचा डीसी दरबार
जिला समाज कल्याण अधिकारी की शिकायत पर बुधवार को ही शाहबाद खंड के गांव कतलेहड़ी के पूर्व सरपंच पर केस दर्ज किया गया है। वहीं खंड पिहोवा के गिलेहड़वा गांव के पूर्व सरंपच का मामला भी अब डीसी दरबार पहुंच गया है। विभाग के अनुसार इस मामले में भी दो लाख रुपये का गबन किया गया है। यहीं नहीं जिले के चार पूर्व सरपंच पहले से ही पेंशन फर्जीवाड़े में कार्रवाई का सामना कर रहे हैं।
विभाग बरत रहा है सख्ती : सुरजीत कौर
जिला समाज कल्याण अधिकारी सुरजीत कौर का कहना है कि पूर्व सरपंचों के कार्यकाल में बुढ़ापा पेंशन में फर्जीवाड़ा करने की शिकायतें लगातार विभाग को मिल रही है। लोग सीएम विंडो से लेकर जिला उपायुक्त तक से शिकायतें कर रहे हैं। इसके चलते विभाग भी सख्त हो चुका है। विभाग ने सभी संदिग्ध पूर्व सरपंचों से लेकर दूसरे संदिग्ध पात्रों को भी नोटिस जारी कर दिए हैं। सख्ती के कारण विभाग को लगभग 20 लाख रुपये तक की रिकवरी हर माह मिलने लगी है।