कुरुक्षेत्र। हरियाणा की लोकसंस्कृति में रागनी एक महत्वपूर्ण कला है। पाश्चात्य संस्कृति के कारण युवा वर्ग में हरियाणवी रागनी धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही है। पुराने समय में रागनी केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं थी, बल्कि समाज में चेतना लाने के लिए रागनी गायन किया जाता था। यह विचार हरियाणा पशुधन बोर्ड के अध्यक्ष धर्मबीर मिर्जापुर ने हरियाणा कला परिषद द्वारा कला कीर्ति भवन में आयोजित रागनी कार्यक्रम में व्यक्त किए। वे यहां मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करने पहुंचे थे।
जानकारी के अनुसार कला परिषद की ओर से साप्ताहिक संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें हरियाणा के ख्याति प्राप्त तथा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित रागनी गायक प्रेम सिंह देहाती ने हरियाणवी रागनियों की प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम से पूर्व हरियाणा कला परिषद के कार्यालय प्रभारी धर्मपाल गुगलानी ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का आगाज प्रेम सिंह देहाती ने ईश्वर वंदना से किया, जिसमें रखियों रख्यिो जी लाज हमारी, कृष्ण मुरारी रागनी के माध्यम से प्रेम सिंह देहाती ने भगवान कृष्ण की महिमा का गुणगान किया। इसके बाद चार दिन की चमक चांदनी करले जो करना, फेर बुढ़ापा बैरी आवे दुख पड़े भरना जैसी रागनी के माध्यम से जीवन के सच को उजागर किया। प्रेम सिंह ने एक के बाद एक रागनी से खूब समां बांधा। श्रोताओं की डिमांड पर प्रेम सिंह द्वारा मटरु की बिजली का मंडोला तथा दादा लख्मी जैसी फिल्मों में गाई गई रागनियों तथा लोकगीतों को भी प्रेम सिंह ने श्रोताओं की नजर किया। हरियाणा की रागनी न केवल मनोरंजन का एक सशक्त माध्यम रही है, बल्कि समाज सुधार की दिशा में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों द्वारा सभी कलाकारों को सम्मानित किया गया। संवाद