कुरुक्षेत्र। लगातार बारिश से शहर में बाढ़ जैसे हालात है। कीर्तिनगर, गांधीनगर, खेड़ी रामनगर, प्रतापगढ़, अमरगढ़ मझाड़ा, सुंदरपुर, खेड़ी मारकंडा में 6-6 फीट तक पानी घरों के भीतर भी घुस चुका है। लोगों को मजबूरन घरों की छतों पर रहना पड़ रहा है और वहीं खेतों में पांच फीट तक पानी भर गया है। वर्षा प्रभावित इन क्षेत्रों में आज स्कूलों की बसें भी नहीं पहुंच पाईं, मजबूरन बच्चों को स्कूल से छुट्टी मारनी पड़ी।
खेडी मारकंडा में बारिश के कारण घरों के अंदर 4-4 फीट पानी जमा हो गया है। रातभर ग्रामीण घरों में घुसे पानी को बाल्टियों के साथ बाहर निकालते रहे, लेकिन रातभर पानी का स्तर बढ़ता रहा। इन घरों पानी भर जाने के कारण में रात से लेकर अब तक चूल्हा नहीं जला। ग्रामीण आगामी 1-2 दिन तक अभी भी पानी का लेवल बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है। खेडी मारकंडा में घरों व गलियों में पानी भर जाने से लोग भूखे प्यासे अपने घर की छतों पर बैठे हैं। इसी तरह कीर्तिनगर की गलियों में पानी जमा होने के कारण वहां वाहनों की आवाजाही बंद हो गई है। लोगों को मजबूरन 2 से 6 फीट खड़े पानी से गुजरना पड़ा। आजाद सिंह, बृज कुमार, सुमन, निर्मला, पालो देवी, दिपो देवी,दीपक ने बताया कि घरों में पानी घुस जाने से उनका सारा सामान खराब हो गया है। घर में रखा अनाज व खाने का अन्य सामान पानी में बह गया। रसोईघर में पानी भर जाने से बच्चों ने कल रात से खाना नहीं खाया। उन्होंने बताया उनकी मदद के लिए सुबह प्रशासनिक अधिकारी आए और आश्वासन देकर चले गए।
गड्ढे में ट्रॉला फंसने से लगा जाम
कुरुक्षेत्र-पिपली रोड पर केयू द्वितीय द्वार के आगे बारिश के कारण सड़क पर हुए गहरे गड्ढे में सवारियों से भरी बस फंस जाने से सड़क पर जाम लग गया। जिसे तकरीबन एक घंटे काफी मशक्त के बाद क्रेन की मदद से निकाला गया, जिसके तुरंत बाद उस गड्ढे में एक ट्राला फस गया, जिसकी वजह से सड़क पर लंबा जाम लग गया और पांच घंटे राहगीर जाम में फंसे रहे। ट्राले को प्रशासन द्वारा दो क्रेन की मदद कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला।
पार्कों में भी जलभराव
सेक्टर के पार्कों में भरा पानीबारिश से सेक्टरों के पार्क पानी से लबालब हो गए हैं। बच्चे पार्कों में जमा पानी में खेल रहे हैं, जिससेे उनके बीमार होने का भी खतरा है। सेक्टर 7 निवासी संतोष बाला ने बताया कि सेक्टर में जगह-जगह पानी भर जाने से स्थिती बहुत खराब हो गई है। सड़कों व पार्क में 3-3 फीट गहरा पानी जमा हो गया है, जिसके कारण सेक्टरवासी घरों में कैद हो गए हैं। पानी के निकासी की सही व्यवस्था न होने के कारण सड़कों व पार्क में जमा पानी कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। इस स्थिती में सभी सेक्टरवासी चिंतित हैं।
किसानों के लिए आफत बनी मारकंडा नदी
मारकंडा नदी में जलस्तर का उफान दूसरे दिन भी जोरों पर है। कई स्थानों पर मारकंडा नदी का पानी ऑवरफ्लो होकर खेतोंमें घुस गया। इससे सैकडों एकड़ फसल जलमग्न हो गई है। खेतोंमें पहले ही बरसाती पानी जमा था। इसके बाद मारकंडा नदी का पानी आ जाने से खेतों में बाढ़ की स्थिति बन गई है। हालांकि अभी तक किसी भी जगह से तटबंध टूटने का समाचार नहींहै। फिर भी तटबंधों के ऊपर से पानी गुजरने से किसी भी वक्त तटबंध टूट सकता है। मारकंडानदी का पानी पर नजर रखने के नहरी विभाग के दावे फेल होते नजर आ रहे है। पिहोवा नहरी विभाग के एसडीओ सूर्यांशगुप्ता ने कहाकि मारकंडा नदी का पानी अभी भी खतरे के निशान से नीचे चल रहा है। यदियह पानी खतरे के निशान पर पहुंचता है तो मारकंडा नदी का पानी ड्रेन में खोल दिया जाएगा।जहां से मारकंडा नदी का पानी ऑवरफ्लो हो रहा है। वहां पर कट्टे लगाने के लिए मजदूरभेजे गए है। किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है। शीघ्र ही ऑवरफ्लो होने वाले स्थानोंको ठीक कर दिया जाएगा।
सारसा माइनर और ज्योतिसर में ड्रेन का बांध टूटा
तीन दिनों से जारी मूसलाधार बारिश के कारण ज्योतिसर एसवाईएल नहर में जल स्तर बढ़ने के बाद आधी अधूरी तैयारियों के बावजूद ड्रेन में पानी छोड़ा गया, जिसके कारण ज्योतिसर सहित आधा दर्जन गांवों का यातायात संपर्क टूट गया। वहीं ड्रेन का बांध टूटने से पानी खेतों में घुस गया, जिससे गांव ज्योतिसर, देबखेड़ी, मुंडाखेड़ा, नींदबड़ी व गढ़ी में 200 एकड़ फसल बाढ़ की चपेट में आ गई। इधर, पिहोवा में सारसा माइनर टूटने से करीब 100 एकड़ फसल डूब गई। बाढ़ के पानी से आधा दर्जन गांवों का जनसंपर्क भी प्रभावित हो रहा है।
उधर, पिहोवा के गांव गढी सिंघा के पास गत सोमवार की रात सारसा माइनर (रजबाहा) टूटने से करीब 100 एकड़ फसल जलमग्न हो गई। माइनर टूटने की भनक लगते ही किसान अपने-अपने खेतों की ओर दौड पड़े और अपने स्तर पर पानी रोकने का प्रयास किया। उधर, नहरी विभाग ज्योतिसर के एसडीओ विनोद ने बताया कि यह माइनर काफी पुराना है, जिसकी कई बार मरम्मत की गई है। माइनर के टूटने की सूचना मिलते ही इसे दोबारा जोडने का काम शुरू करा दिया गया।
आधा दर्जन गांवों का टूटा जनसंपर्क
ड्रेन में जलस्तर ऑवरफ्लो होने से गांव ज्योतिसर से बलाही, डेरा प्रेम नगर, समसपुर, मुंडाखेड़ा, दबखेड़ी, छैल्लों, सुरमी और बगथला से जनसंपर्क टूट गया, जिसके कारण ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
गांव में घुसा मारकंडा नदी का पानी
शाहाबाद। मूसलाधार हुई बरसात के बाद मारकंडा नदी उफन पर है। पिछले दो दिनों से नदी में करीब 11 हजार क्यूसिक पानी बह रहा है। पानी बहाव पर नियंत्रण न होने से मंगलवार को नदी का पानी गांव कठवा में घुस गया है, जिससे चारों ओर बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। सरपंच अमरिंद्र सिंह कठवा ने बताया कि आज तक किसी प्रशासनिक अधिकारी ने इस गांव की सुध नहीं ली है और बरसात के दिनों में मारकंडा नदी का पानी घुस जाने से जहां फसलें बर्बाद हो गई। उन्होंने बताया कि प्रशासन द्वारा सोमवार को ग्राम पंचायत को इंजन उपलब्ध कराया था, ताकि पानी की निकासी हो सके, लेकिन इंजन के खराब हो जाने पर उन्होंने कई बार प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष गुहार लगाई, लेकिन अधिकारियों ने कहा कि वे खुद अपने स्तर पर ठीक कराएं। बताया कि गांव के स्कूलों में लबालब पानी भरने से विद्यार्थी भी शिक्षा से वंचित हैं। यही नहीं सड़कों पर कीचड़ पैदा होने राहगीरों को भी भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।