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Kurukshetra News: फिर न तबाही मचा दे मारकंडा से निकली बाढ़, स्थायी समाधान की ओर बढ़ने लगे कदम

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कुरुक्षेत्र। गांव नैसी में बाढ़ में डूबी फसलें  इस तरह से हो गई बार्बद। संवाद
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कुरुक्षेत्र। एक बार की बाढ़ से उबरने की कोशिश पूरी भी नहीं होती कि अगली तबाही फिर दरवाजे पर खड़ी मिलती है। यह सिलसिला मारकंडा नदी के आसपास बसे गांवों के साथ पीढ़ियों से चला आ रहा है। इससे न केवल फसलों के साथ किसानों के अरमान पानी में डूब जाते हैं बल्कि अब तक कई जिंदगियां भी खत्म हो चुकी हैं। इस बार फिर बाढ़ की स्थिति ने जमकर कहर बरपाया है जिससे फसलों से लेकर सड़कें व अन्य व्यवस्था भी चौपट हो गई है। इसकी भरपाई आसान नहीं है लेकिन भविष्य में मारकंडा से निकलने वाली बाढ़ फिर न तबाही मचा दे, इसके लिए चारों ओर से कदम आगे बढ़ने लगे हैं। ऐसे में स्थायी समाधान की उम्मीद जगने लगी है।
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सिंचाई विभाग से लेकर सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड व जिला परिषद सहित अन्य संबंधित विभागों ने इसके लिए न केवल विचार किया है बल्कि योजना पर कार्य शुरू कर दिया है। सिंचाई विभाग की ओर से नदी की चौड़ाई बढ़ाने व स्थायी तटबंध बनाए जाने की योजना के संबंध में तालमेल किया जा रहा है। इसके लिए जिला उपायुक्त से लेकर मुख्यमंत्री तक भरोसा दे चुके हैं और ग्राम पंचायतों से लेकर संबंधित किसान भी सहमति जताने लगे हैं। सिंचाई विभाग एक-एक गांव व किसान के संपर्क में है।
.... हमें हर साल की मार नहीं स्थायी समाधान चाहिए
बार-बार बाढ़ से होने वाली तबाही से बचने के लिए अब किसान व ग्राम पंचायतें भी स्थायी समाधान की ओर बढ़ने लगी है। एक सप्ताह पहले ही मुख्यमंत्री नायब सैनी बाढ़ के हालात का जायजा लेने पहुंचे तो नैसी, शेरगढ़, टबरा, मडाडो, जंधेड़ी सहित कई ग्राम पंचायतों ने स्थायी समाधान की मांग उठाई थी। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि उन्हें बार-बार की मार से बचाया जाए। इसके लिए जमीन एक्वायर करवाने में भी सरकार का सहयोग करने को तैयार हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने भी भरोसा दिया था।
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बर्बाद फसल देख निकल आते हैं आंसू : कंवलजीत
गांव नैसी के सरपंच कंवलजीत सिंह बताते हैं कि वे उनके दादा के समय से ही बाढ़ से उजड़ती फसलें देखते आ रहे हैं। पूरी तरह से बर्बाद फसल को देख पूरे परिवार के आंसू निकल आते हैं। किसी साल एक तो कभी दो-दो फसलें मर जाती हैं। पूरे क्षेत्र के किसान बाढ़ की मार के चलते उभर नहीं पा रहे। सरकार को भले ही जमीन एक्वायर करनी पड़े लेकिन स्थायी समाधान करना ही होगा। अब 90 फीसदी से ज्यादा किसान यह स्वीकार कर चुके हैं।
नैसी की 1200 एकड़ फसल बर्बाद
सरपंच कंवलजीत का कहना है कि उनके गांव नैसी के पास दो जगहों से मारकंडा के तटबंध टूटे थे। गांव की करीब 1200 एकड़ फसल 100 फीसदी बर्बाद हो चुकी है। 100 से ज्यादा ट्यूबवेल के बोर खत्म हो चुके हैं। एक बोर पर करीब साढ़े तीन लाख का खर्च होता है। 22 जुलाई को भी तटबंध टूटने से गांव की करीब 800 एकड़ फसल डूब गई थी। ऐसे ही बाढ़ से आसपास के करीब 20 गांवों में बर्बादी हुई है। सभी लिखित पत्र तक देने को तैयार हैं कि भले ही उन्हें इतने बड़े नुकसान का मुआवजा न दिया जाए लेकिन स्थायी समाधान किया जाए।
500 फीट हो चौड़ाई, जमीन एक्वायर करने की जरूरत : एक्सईएन
सिंचाई विभाग के एक्सईएन मुनीष बब्बर का कहना है कि जिले में करीब 40 किलोमीटर तक मारकंडा बहती है जिसमें से अधिकतर जगह महज 60 से 70 फीट चौड़ाई रह गई है। नदी का बहाव सामान्य रखने के लिए कम से कम 500 फीट तक चौड़ाई व खोदाई करने की जरूरत है। इसके बाद स्थायी तटबंध बने। विभागीय तौर पर योजना बनाई जा रही है लेकिन जमीन एक्वायर करने की जरूरत होगी। अब बड़े स्तर पर किसान सहमत होने लगे हैं। इस योजना को जल्द सिरे चढ़ाए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

कुरुक्षेत्र। गांव नैसी में बाढ़ में डूबी फसलें  इस तरह से हो गई बार्बद। संवाद

कुरुक्षेत्र। गांव नैसी में बाढ़ में डूबी फसलें  इस तरह से हो गई बार्बद। संवाद

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