गांव रामगढ़ रोड में पूनम ने टक्कर में चुनाव लड़ रही अलका को 114 वोटों से हराकर जीत हासिल की। गांव में कुल 1773 वोट हैं। जिसमें से 1630 वोट पोल हुए और 92 प्रतिशत मतदान हुआ। पूनम को 872 वोट मिले, जबकि अलका को 758 वोट मिले। पूनम ने अपनी जीत को न्याय की जीत बताया। बता दें कि पूनम का नामांकन पिहोवा प्रशासन ने रद्द कर दिया था, जिसे पूनम ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट के आदेशों पर पिहोवा प्रशासन ने गांव में चुनाव कराए। जीत के बाद पति कुलदीप सहित पूरा परिवार उत्साह में डूबा हुआ है। गांव में तनाव की स्थिति को भांपते हुए प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए थे।
बीडीपीओ नवनीत कौर टिवाणा, डीएसपी चंद्रपाल व एसएचओ के नेतृत्व में पोलिंग बूथ के आसपास कड़ी सुरक्षा रखी गई। मतदान के लिए तीन बूथ बनाए गए थे। रामगढ़ रोड में पहले चरण में 10 जनवरी को मतदान होना था। इससे लिए गांव से पूनम, अलका व जसविंद्र कौर ने नामांकन पत्र भरा था। छंटनी के दौरान पूनम व जसविंद्र का नामाकंन इस आरोप में रद्द कर दिया कि इन दोनों के परिवार का पंचायती जमीन पर कब्जा है।
फैसले से पूनम असंतुष्ट नजर आई और उसने इस फैसले के खिलाफ हाइकोर्ट में याचिका दायर की। जिस पर सुनवाई करते हुए हाइकोर्ट में माना कि जिस जमीन पर कब्जे का आरोप पूनम के परिवार पर है, असल में उस जमीन से उसके परिवार का कोई लेन देन नहीं है। इसी को ध्यान में रखते हुए हाइकोर्ट ने प्रशासन को पूनम को चुनाव लड़ाने के आदेश जारी कर दिए थे।