कुरुक्षेत्र। पति-पत्नी में बेटे की संपत्ति के लिए चले विवाद में सिविल जज जूनियर डिवीजन जप जी सिंह की अदालत ने बेटे की ओर से लिखी गई वसीयत के आधार पर पिता राजकुमार को पूर्ण मालिक घोषित कर दिया। अदालत ने सेक्टर 17, अर्बन एस्टेट और तीन अन्य कमर्शियल संपत्तियों के लिए माता और अन्य प्रतिवादियों को उनकी संपत्ति से कब्जे में हस्तक्षेप न करने के आदेश दिए हैं।
राज कुमार गुप्ता ने अदालत में दावा किया कि सेक्टर 14 एससीओ नंबर एक व 98, बूथ नंबर 134 ये संपत्तियां उनके बेटे मनीष गुप्ता की थी, जो दोनों का इकलौता बेटा था। मनीष गुप्ता का विवाह भिनी से हुआ था लेकिन 3 जनवरी 2019 को यमुनानगर फैमिली कोर्ट में आपसी सहमति से तलाक हो गया और कोई संतान नहीं थी।
मनीष गुप्ता का स्वास्थ्य खराब था। इसलिए मनीष ने 18 मार्च 2020 को अपनी पूरी चल-अचल संपत्ति अपने पिता राज कुमार गुप्ता के नाम वैध वसीयत की थी। वसीयत के गवाह नंबरदार माला राम और जय भगवान थे। 23 जुलाई 2023 को मनीष गुप्ता की मृत्यु हो गई। राम कुमार का आरोप था कि उनकी पत्नी वीणा गुप्ता संपत्ति पर अपना दावा कर रही हैं और उनके कब्जे में हस्तक्षेप करने की कोशिश कर चुकी हैं।
अदालत में सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष नोटिस के बावजूद उपस्थित नहीं हुआ और 9 नवंबर 2023 को अदालत ने इस पूरी कार्रवाई को एकतरफा घोषित कर दिया। वसीयत की वैधता नंबरदार माला राम की गवाही से साबित हो गई।