कुरुक्षेत्र/पिपली। धान की सीधी बिजाई (डीएसआर) करने वाले किसानों के लिए राज्य सरकार चार हजार रुपये प्रति एकड़ की सब्सिडी प्रदान कर रही है, जो देश में सबसे अधिक है। हरियाणा सतत धान खेती को बढ़ावा देने में अग्रणी राज्य है। पारंपरिक रोपाई विधियों के विपरीत, जिसमें अत्यधिक पानी की आवश्यकता होती है, डीएसआर में पौधों को रोपाई करने की जरूरत नहीं होती, जिससे पानी की खपत और श्रम लागत में काफी कमी आती है।
यह कहना है कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा का। वे शुक्रवार को कृषि विभाग के सहयोग से जल संरक्षण आधारित खेती को बढ़ावा देने के लिए पैराकीट पिपली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बोल रहे थे। कार्यशाला में डीएसआर अपनाने के फायदों और चुनौतियों पर चर्चा की गई। कार्यशाला में किसानों और कई जिलों के कृषि उपनिदेशकों ने भाग लिया। जिन्होंने डीएसआर की संभावनाओं पर चर्चा की, जिससे भूजल स्तर की गिरावट को रोकने और धान की खेती की दक्षता में सुधार किया जा सके। उन्होंने प्रदेश सरकार की किसानों को सतत कृषि की ओर स्थानांतरित करने में सहायता करने वाली योजनाओं को लेकर कहा कि राज्य के किसानों के लिए जल संरक्षण एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। प्रदेश सरकार का लक्ष्य तीन लाख एकड़ भूमि को डीएसआर खेती के अंतर्गत लाना है, और 2024 तक 50,540 किसान पहले ही 1.8 लाख एकड़ भूमि पर इस तकनीक को अपना चुके हैं।
उन्होंने कहा कि धान हरियाणा की एक प्रमुख फसल है, जिसका 2022-23 में उत्पादन 59.21 लाख टन से अधिक था। राज्य में धान की खेती लगभग 30 लाख हेक्टेयर में फैली हुई है। हालांकि, किसानों को घटते जलस्तर, खरपतवार नियंत्रण और श्रम लागत जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। पारंपरिक धान खेती में प्रति किलोग्राम धान उत्पादन के लिए लगभग 3000-4000 लीटर पानी की आवश्यकता होती है, जिससे यह एक जल-गहन प्रक्रिया बन जाती है।
सवाना सीड्स के सीईओ और एमडी तथा फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अजय राणा ने डीएसआर की सफलता सुनिश्चित करने में तकनीक की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उचित बीज चयन और सटीक सिंचाई के साथ, किसान अधिक उपज प्राप्त कर सकते हैं और साथ ही भूजल संरक्षण भी कर सकते हैं।