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Kurukshetra News: धान घोटाले की सीबीआई जांच की मांग लेकर सड़कों पर उतरे किसान

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कुरुक्षेत्र। गुरुनाम सिंह चढू़नी रोष मार्च के दौरान किसानों को संबो​धित करते हुए। संवाद 
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कुरुक्षेत्र। प्रदेश में पांच हजार करोड़ से भी अधिक के धान घोटाले की सीबीआई जांच और अन्य मांगों के लिए शनिवार को भारतीय किसान यूनियन सड़कों पर उतर आई और रोष मार्च निकाला। मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे और 23 मार्च तक मांगों को पूरा करने का अल्टीमेटम दिया।
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भाकियू अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी के नेतृत्व में किसान पहले जाट धर्मशाला में एकत्रित हुए। यहां बैठक के बाद रोष जताते हुए जिला सचिवालय पहुंचे और धरना दिया। इस दौरान भारी पुलिस बल डीएसपी सुनील कुमार के नेतृत्व में पुख्ता बंदोबस्त के साथ तैनात रहा।
चढूनी ने कहा कि इस धान खरीद सीजन के दौरान मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल और राज्य की खरीद एजेंसियों, मंडी प्रशासन और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से किए गए कार्यों में गंभीर अनियमितताएं, संदिग्ध सत्यापन, फर्जी रकबा वृद्धि व अवैध खरीद के अत्यंत गंभीर मामले सामने आ चुके हैं। इस घोटाले की जांच सीबीआई से कराई जाए और दोषियों पर कार्रवाई हो।
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प्रदेशाध्यक्ष कर्म सिंह मथाना ने कहा कि मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर अवैध व संदिग्ध रकबा सत्यापन 4,83,897 किसानों की ओर से 28,80,192 एकड़ गैर-बासमती धान पंजीकृत की गई। परंतु कृषि विभाग ने 30,16,285 एकड़ भूमि वेरिफाई कर दी। ऐसे में 1,36,116 एकड़ अधिक धान कहां से आई जोकि बड़ा आपराधिक कृत्य है। उन्होंने कहा कि साक्ष्य दर्शाते हैं कि इस अतिरिक्त रकबे का किसानों से कोई संबंध नहीं है। यह भूमि किसकी है, कहां स्थित है, किसने सत्यापित की यह स्पष्ट नहीं है जिससे भारी स्तर पर भ्रष्टाचार की आशंका बनती है। कई जगह नदी, नाले, अवैध कॉलोनियां, पाप्लर, गन्ना व अन्य फसलों वाले खेतों को भी धान का रकबा दिखाकर सत्यापित किया गया, जो गंभीर जालसाजी है। यूनियन प्रवक्ता राकेश बैंस ने संबोधित करते हुए कहा कि छह जिलों में 64,726 एकड़ धान दिखाया गया, परंतु खरीद एक दाना भी नहीं हुई।
भिवानी, गुरुग्राम, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, मेवात और चरखी दादरी में 64,726 एकड़ धान बताया गया। परंतु वास्तविक खरीद शून्य है। यह धान का रकबा दिखाकर सत्यापित किया गया। यदि धान की फसल पैदा हुई तब खरीद एजेंसियों ने इन जिलों में खरीद क्यों नहीं की। अगर रिकॉर्ड में पैदा धान किस-किस जिले व किस-किस मंडी में बिका, जिसका अन्य प्रदेशों से धान या चावल मंगवाकर सरकारी खरीद में कैसे दर्शाया गया, जो गंभीर जालसाजी है।
यूनियन जिलाध्यक्ष कृष्ण कलाल माजरा ने कहा कि तत्काल घोटाले की निष्पक्ष जांच सीबीआई से करवाई जाए, संबंधित सभी रिकॉर्ड जब्त कर संरक्षित किया जाए और खरीदी व सत्यापन में शामिल अधिकारियों व कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज की जाए। उन्होंने किसानों को कर्ज मुक्त करने, बीज बिल पर पुनर्विचार करने, शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए जा रहे भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की मांग भी की गई।
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