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Kurukshetra News: किसान बोले- इस बार भी रह गए खाली हाथ, न कर्ज माफी पर न ही एमएसपी पर कोई बात

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कुरुक्षेत्र। प्रदेशाध्यक्ष कर्म सिंह मथाना।
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कुरुक्षेत्र। केंद्र सरकार के बजट से किसान पूरी तरह से नाखुश ही दिखाई दिए। किसानों का कहना है कि बजट में उनके हाथ पूरी तरह से खाली रहे हैं। सरकार ने न कर्ज माफी पर और न ही एमएसपी पर कोई बात की है और यही सबसे बड़े मुद्दे थे। यही नहीं किसानों के लिए लागू किए गए क्रेडिट कार्ड का दायरा बढ़ाने के लिए भी सरकार ने बजट में कोई जिक्र तक नहीं किया। ऐसे में किसानों को बजट से कुछ भी सीधे तौर पर हासिल नहीं हुआ है।
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बजट कॉरपोरेट को बढ़ावा देने वाला रहा किसान को नहीं : राकेश बैंस
भारतीय किसान यूनियन चढूनी गुट के प्रवक्ता राकेश बैंस का कहना है कि बजट कॉरपोरेट और कागजी योजनाओं को तो राहत देता है लेकिन खेत में पसीना बहाने वाले किसान को नहीं। सरकार को समझना होगा कि किसान को एप या भाषण नहीं बल्कि दाम, सुरक्षा और सम्मान चाहिए। बजट में तकनीक, एआई प्लेटफॉर्म और भविष्य की योजनाओं की बातें तो कीं लेकिन किसानों की तत्काल समस्याओं जैसे फसलों की कानूनी एमएसपी गारंटी, बढ़ती खेती लागत, डीजल, खाद, बीज और कीटनाशकों की महंगाई, किसानों की कर्ज माफी, प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान की समुचित भरपाई और पीएम किसान सम्मान निधि की राशि बढ़ाने जैसे मुद्दों पर सरकार पूरी तरह मौन रही।

किसानों के लिए सस्ते कृषि ऋण की थी उम्मीद : कर्म सिंह
भाकियू प्रदेशाध्यक्ष कर्म सिंह मथाना का कहना है कि सरकार को चाहिए था कि बजट में एमएसपी पर कानूनी गारंटी दी जाती। पीएम किसान निधि राशि को कम से कम 12,000 प्रतिवर्ष किए जाने, किसानों के लिए कर्ज माफी और सस्ती ऋण व्यवस्था लागू करने, फसल बीमा को सरल, पारदर्शी और किसान-हितैषी बनाए जाने की उम्मीद थी, जो धरी की धरी ही रह गई।
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केसीसी पर बीमा राशि तय की जानी चाहिए थी : संजू नंंबरदार
भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह के जिला प्रधान संजू नंबरदार का कहना है कि सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड लागू किया हुआ है। पिछले बजट में इसका दायरा पांच लाख तक बढ़ाया जाना तय किया था, जो आज तक लागू नहीं हुआ। इस बार भी इस पर जिक्र नहीं किया। इस कार्ड पर किसान का बीमा भी नहीं है जबकि सरकार को इस पर बीमा राशि तय करनी चाहिए थी। किसान को कर्ज से निकालने के लिए कोई नीति का प्रावधान बेहद जरूरी था।
खाली हाथ ही रह गए, कुछ नहीं मिला : अर्जुन सिंह
गांव रामनगर के किसान अर्जुन सिंह का कहना है कि बजट में किसान पूरी तरह से खाली हाथ ही रह गए हैं। कुछ भी हासिल नहीं हुआ। सरकार ने किसानों को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया है। प्राकृतिक तौर पर किसानों को होने वाले नुकसान की भरपाई पर भी सरकार ने कोई बात नहीं की जबकि किसानाें पर हर सीजन में बाढ़, सूखे, ओले, बीमारी व अन्य प्रकार की प्राकृतिक मार पड़ती है।
सरकार ने बजट में ये किए हैं प्रावधान
केंद्रीय बजट में सरकार ने किसानों के लिए कई प्रावधान किए हैं। सरकार बहुभाषी (मल्टीलिंगुअल) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टूल लॉन्च करेगी जिससे एग्री-स्टैक पोर्टल और आईसीएआर की रिसर्च को जोड़ा जाएगा। किसान अपनी भाषा में मौसम, खाद, कीट नियंत्रण और फसल प्रबंधन की सटीक सलाह सीधे अपने फोन पर पा सकेंगे। सरकार नारियल और काजू मिशन चलाएगी। पशुपालन क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी के जरिये डेयरी और मुर्गी पालन क्षेत्र के आधुनिकीकरण के लिए आसान लोन और सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों का एकीकृत विकास किया जाएगा जिससे ग्रामीण इलाकों में रोजगार बढ़ेगा। खेती के लिए डिजिटल ढांचा तैयार किया जाएगा ताकि किसानों को बीज से लेकर बाजार तक की जानकारी पारदर्शी तरीके से मिले। इसके साथ ही एक करोड़ किसानों को अगले दो वर्षों में प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य तय किया गया।

कुरुक्षेत्र। प्रदेशाध्यक्ष कर्म सिंह मथाना।

कुरुक्षेत्र। प्रदेशाध्यक्ष कर्म सिंह मथाना।

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