कुरुक्षेत्र। जिले में यूरिया को लेकर किसानों का जद्दोजहद करनी पड़ रही है। यूरिया लेने के लिए किसान सुबह चार बजे ही लाइन लगाना शुरू कर देते हैं, मगर उसके बाद भी उनको पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध नहीं हो रहा है। किसान सीधे तौर पर यूरिया की उपलब्धता को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहे हैं।
किसानों का कहना है कि अगर सरकार पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध करा रही है तो वो यूरिया जा कहां रहा है ? क्योंकि जिले भर के किसानों की मांग भी पूरी नहीं हो रही है। किसान आरोप लगा रहे हैं कि सरकार यूरिया के आंकड़ों में हेरफेर कर रही है। रात के समय बॉर्डर पार (पंजाब) यूरिया की तस्करी की जा रही है। वहीं पेस्टीसाइड व्रिकेता अवैध तौर पर यूरिया को स्टॉक कर रहे हैं तथा सरकार व प्रशासन को गुमराह कर रहे हैं।
जिले भर में करीब एक लाख 10 हजार हेक्टेयर में गेहूं की फसल लगाई गई है। इसके अलावा करीब पांच हजार एकड़ सरसों का एरिया बढ़ा है। इस आंकड़े के तहत जिलेभर में करीब सवा 8 लाख बैग यूरिया की जरूरत है, मगर कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर तक 54 हजार एमटी यूरिया यानी जरूरत से ज्यादा यूरिया किसानों को वितरित किया जा चुका है। अब इसे लेकर किसान सवाल उठा रहे हैं कि अगर जरूरत से ज्यादा यूरिया उपलब्ध कराया गया है तो वह कहां गया। क्योंकि कोई भी किसान यूरिया स्टॉक करने की हालत में नहीं है। हर किसान के पास फंड्स मौजूद नहीं है। दूसरा एक महीने बाद यूरिया खराब हो जाता है। बुधवार को यूरिया नहीं पहुंचने पर किसान सुबह के समय इंतजार के बाद अपने घर लौट गए।
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पेस्टीसाइड विक्रेता पर केस दर्ज
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मंगलवार को कृषि विभाग के अधिकारियों की छापेमारी में पिहोवा स्थित एक गोदाम से 300 बैग यूरिया के बरामद हुए थे। पेस्टीसाइड विक्रेता ने दावा किया था कि इस यूरिया का उसके पास रिकॉर्ड है, जिसे पर पेश कर देगा, मगर मामले की जांच के बाद दुकानदार बरामद यूरिया का रिकॉर्ड पेश नहीं कर पाया। थाना सदर पिहोवा प्रभारी प्रतीक कुमार ने बताया कि कृषि विभाग के अधिकारियों की शिकायत पर पुलिस ने दो लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
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प्रशासन की मिलीभगत से हो रही कालाबाजारी: प्रिंस वड़ैच, फोटो 29
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भाकियू के प्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि अगर कृषि विभाग के अधिकारियों की मानें तो करीब 40 प्रतिशत अधिक यूरिया पहुंचा है तो फिर किसान को क्यों नहीं मिल रहा है। इसका मतलब है कि बड़े स्तर पर प्रशासन की मिलीभगत से खाद की जमाखोरी और कालाबाजारी हो रही है या फिर रात के समय बॉर्डर पार महंगे दामों में बेचा जा रहा है। मांग है कि तुरंत इस मामले में संज्ञान लेकर कार्रवाई कर खाद की सामान्य उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, अन्यथा भाकियू कृषि विभाग के कार्यालयों पर ताला जड़ेगी।
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किसान के लिए स्टॉक करना मुश्किल: संजीव कुमार, फोटो 30
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किसान संजीव कुमार ने बताया कि किसान की आर्थिक हालात बेहद खराब है। किसान के लिए तो जरूरत के अनुसार खाद खरीद के लिए पैसे का इंतजाम करना ही मुश्किल हो रहा है। किसान तो यूरिया को स्टॉक नहीं करेगा। दूसरी ओर यूरिया एक महीने बाद नमी से जम जाएगा, जो किसान के लिए किसी काम का नहीं होगा। वहीं किसानों को दिसंबर तक ही यूरिया की जरूरत है, मार्च में यूरिया की जरूरत नहीं होगी। मांग है कि किसानों को मांग के अनुसार यूरिया उपलब्ध कराया जाए।
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यूरिया की नहीं कोई कमी: शशिपाल
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गुणवत्ता नियंत्रक अधिकारी शशिपाल ने बताया कि जिले में यूरिया की कमी नहीं है। मार्च तक 65 हजार एमटी यूरिया की जरूरत है। दिसंबर तक 54 हजार एमटी यूरिया वितरित हो चुका है। यूरिया स्टॉक की शिकायत पर विभाग की टीम तुरंत कार्रवाई कर रही है। गत दिवस भी विभाग की टीम ने छापेमारी करके 300 बैग यूरिया गोदाम से बरामद किया था। दोनों आरोपी भाइयों के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज किया है। विभाग की ओर से उनका लाइसेंस भी रद्द किया जाएगा, जिसकी प्रक्रिया शुरू कर दी है।