भारतीय किसान यूनियन के प्रधान गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि हरियाणा में हो रही अनुसूचित वर्ग व किसान महापंचायतें किसान आंदोलन की बड़ी रणनीति का हिस्सा है। यह लड़ाई सभी जातियों, धर्मों, कर्मचारियों, मजदूरों व आढ़तियों को साथ लेकर लड़ी जाएगा। चढ़ूनी शनिवार को शाहाबाद के शहीद उधम सिंह स्मारक में आयोजित अनुसूचित जाति व किसान महापंचायत को संबोधित कर रहे थे।
चढ़ूनी ने कहा कि पहले की तरह मई में दिल्ली कूच की तैयारी की जा रही है और इस बार यह मिशन पहले से भी प्रभावी ढंग से पूरा होगा। इस बार दिल्ली कूच को लेकर सड़क पर बाधाएं आईं तो पहले अनुभव के आधार पर इसे पूरी तैयारी से निपटा जाएगा। आज समाज व देश को बचाने के लिए सभी एकजुट हो चुके हैं, निश्चित तौर पर इसके सकारात्मक परिणाम आएंगे।
गुरनाम सिंह ने कहा कि अनुसूचित समाज के साथ-साथ हर वर्ग के लोगों को किसानों के साथ मिलकर इस तरह की महापंचायतें करनी चाहिए ताकि देश व समाज को शोषित होने से बचाने के लिए मिलकर यह लड़ाई लड़ी जा सके। उन्होंने अडानी, अंबानी व रामदेव के उत्पादकों का विरोध करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अडानी व अंबानी की एक घंटे की कमाई 90 करोड़ है, ऐसे पूंजीपतियों के हाथ में अनाज चला गया तो देश भूखा मर जाएगा।
उन्होंने कहा कि आने वाले चुनाव में किसान आंदोलन का सहयोग न करने वाले लोगों का डट कर विरोध किया जाएगा। आंदोलन में शहीद हुए किसानों को सहायता राशि देने वालों के यहां भी सरकार ने छापे मरवाने का काम किया है। फिलहाल हरियाणा के किसान शांति बनाए हैं और नहीं तो पंजाब जैसा हाल यहां के नेताओं का भी हो सकता था। उन्होंने सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों से नुकसान वसूलने की बात पर कहा कि किसान पिछले कई महीनों से टोल टैक्स को बंद करके बैठे हैं और सरकार साढ़े चार सौ करोड़ का नुकसान बता रही है तो यह नुकसान सरकार, किसानों से वसूल के दिखाए और इस बात का नजारा भी देख ले।
अखिल भारतीय परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. उदित राज ने कहा कि संविधान बचाने व निजीकरण के खिलाफ आवाज उठाने के लिए किसान आंदोलन आशा की किरण है, इसलिए अनुसूचित समाज पूरी एकजुटता के साथ किसान आंदोलन को समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित समाज के कुछ राजनेता व नेता ईडी व सीबीआई के झूठे छापों के कारण किसान आंदोलन में सामने नहीं आ पा रहे हैं।
डॉ. उदित राज ने कहा कि सात साल हो गए विपक्षी पार्टियां केंद्र सरकार की तानाशाही को रोक नहीं पाई हैं, बेरोजगारी बढ़ रही है, इलेक्शन कमीशन, अदालतें, सीबीआई, ईडी सभी को भाजपा शासित केंद्र सरकार ने मैनेज कर लिया है, जिससे देश का संविधान खतरे में है। ऐसे में संविधान व देश बचाने के लिए अनुसूचित समाज अकेले नहीं लड़ सकता, इसलिए सभी को एकजुट होकर किसान आंदोलन के माध्यम से यह लड़ाई लड़नी होगी। इस अवसर पर राकेश बैंस, जसबीर सिंह, एडवोकेट वीरेंद्र बिंदा, स्वर्णजीत सिंह, प्रेम, सुखविंदर कंबोज, पंकज, हरकेश, पवन बैंस, कमल कुमार मौजूद रहे।