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Kurukshetra News: विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान में पारिवारिक संस्कार बोध गोष्ठी आयोजित

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कुरुक्षेत्र। गोष्ठी को संबोधित करते मुख्य वक्ता पंडित श्याम स्वरूप मनावत। विज्ञप्ति
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कुरुक्षेत्र। विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान में पारिवारिक संस्कार बोध विषयक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें प्रसिद्ध कथावाचक, मानस मर्मज्ञ व ओजस्वी वक्ता पंडित श्याम स्वरूप मनावत मुख्य वक्ता के रूप में शामिल रहे। मंच पर उनके साथ पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी से महंत बंसीपुरी, बड़ा उदासीन अखाड़ा कुरुक्षेत्र से महंत महेश मुनि, विद्या भारती हरियाणा से प्रांत संरक्षक सत्यनारायण गुप्ता तथा संस्थान के कोषाध्यक्ष वीरेंद्र वालिया रहे।
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कार्यक्रम का संचालन बलबीर ने किया जबकि स्वागत, अतिथि परिचय एवं गोष्ठी की प्रस्तावना संस्थान के प्रबंधक सुधीर कुमार की ओर से प्रस्तुत की गई। अतिथियों को फूल-मालाओं, अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। मुख्य वक्ता पंडित श्याम स्वरूप मनावत ने कहा कि कोई भी कार्य तभी फलदायी और प्रसन्नतादायक होता है, जब उसमें आत्म स्वीकृति हो। आवश्यकता या आग्रहवश किया गया कार्य हमें सेवक बनाता है, जबकि आत्म स्वीकृति से किया गया कार्य स्वयंसेवक बनने की प्रेरणा देता है। विद्या भारती से जुड़े कार्यकर्ता शिक्षा के महायज्ञ में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। संस्कृति मनुष्यों की विशेषता है, पशुओं की नहीं। मानव की ओर से निर्मित कल्याणकारी प्रकृति को ही संस्कृति कहा जाता है और इसके संरक्षण हेतु ज्ञान-यज्ञ की निरंतर आवश्यकता है, ताकि हम अपनी प्रकृति को समाजोपयोगी बना सकें।
महंत बंसीपुरी ने कहा कि आज का समाज अपनी वैदिक सनातन परंपराओं से दूर होता जा रहा है, जबकि एक सूत्र में बंधने का मार्ग इन्हीं परंपराओं के पालन में है। उन्होंने रामचरितमानस को भगवान की लीलाओं का दिव्य संग्रह बताते हुए इसे सामाजिक सद्भाव का आधार बताया। संस्थान के कोषाध्यक्ष वीरेंद्र वालिया ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

कुरुक्षेत्र। गोष्ठी को संबोधित करते मुख्य वक्ता पंडित श्याम स्वरूप मनावत। विज्ञप्ति

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