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Kurukshetra News: साधकों को समझाए ध्यान साधना के लाभ और महत्व

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कुरुक्षेत्र। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा एक दिवसीय साधना शिविर का आयोजन सेक्टर सात के सामने निजी पैलेस में किया गया, जिसमें गुरु आशुतोष की शिष्या साध्वी रूपेश्वरी भारती ने साधक जनों को ध्यान साधना का महत्व समझाया।
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उन्होंने कहा कि मानव तन सृष्टि की सर्वश्रेष्ठ संरचना है इसलिए मानव को ही सृष्टि का सिरमौर कहा गया है। लेकिन आज के परिप्रेक्ष्य में मानव जीवन ही सबसे अधिक दुख, पीड़ा एवं कष्टों का सामना कर रहा है। क्योंकि कोई भी वृक्ष अपने मूल से अलग होकर अधिक समय तक हरा भरा नहीं रह सकता, इसी प्रकार आज मनुष्य का जीवन भी अपने मूल आधार से टूट चुका है।
स्वामी ने कहा कि ब्रह्मज्ञान की ओर से आत्म साक्षात्कार करना ही मानव जीवन का मूल आधार है। ध्यान साधना का किसी विशेष धर्म या संप्रदाय से कोई संबंध नहीं है अपितु इसका संबंध मानव मन की उपयोगिता से हैं। ध्यान साधना हमारे स्थूल, सूक्ष्म एवं कारण तीनों स्तरों पर सकारात्मक प्रभाव डालती है।
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कुछ वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार नित्य निरंतर ध्यान साधना करने वाला व्यक्ति एक साधारण व्यक्ति की तुलना में शारीरिक मानसिक एवं आत्मिक तौर पर अधिक सशक्त एवं स्वस्थ रहता है। गुरु के बिना की गई ध्यान साधना मनुष्य के मस्तिष्क को विकृत कर सकती है, क्योंकि एक साधारण मानव में उन शक्तियों को नियंत्रित करने का सामर्थ्य नहीं होता लेकिन गुरु अपने तपोबल एवं कृपा हस्त के द्वारा साधक को उन शक्तियों का उतना ही प्रवाह नियंत्रित करके अनुभव करवाते हैं, जितना वो सहन कर पाता है। विश्व शांति यज्ञ हेतु धर्मशाला में उपस्थित सभी ब्रह्मज्ञानी साधकों ने अपनी श्रद्धायुक्त ध्यान साधना की आहुति दी।
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