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Kurukshetra News: विशेषज्ञों ने रक्त अतिसार, यकृत रोग, एनीमिया पर साझा किए विचार

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कुरुक्षेत्र।  श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम में संबो​धित करते
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कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के काय चिकित्सा विभाग में चल रहे सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम के पांचवें दिन विशेषज्ञों ने रक्त अतिसार, यकृत रोग, एनीमिया और बॉयोस्टैटिसटिक्स की भूमिका पर विस्तृत व्याख्यान दिए।
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कार्यक्रम के पहले सत्र में आयुर्वेदिक कॉलेज पपरोला की विभागाध्यक्ष डॉ. अंजना मिश्रा ने कहा कि बदलते खानपान और बरसात के मौसम में रक्त अतिसार (ब्लडी डायरिया) के मामले तेजी से बढ़ते हैं। पेट दर्द के साथ मल में खून आना इसके मुख्य लक्षण हैं।
उन्होंने आयुर्वेदिक उपचार पद्धतियों की चर्चा करते हुए पंचकर्म की पिच्छा बस्ति, पित्त सामक चिकित्सा, मृदु विरेचन तथा विभिन्न आयुर्वेदिक औषधियों के लाभकारी प्रभाव बताए।
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उन्होंने बताया कि अनुचित खानपान भी यकृत विकारों और काला पीलिया को बढ़ावा देता है। इस दौरान उन्होंने पीलिया के विभिन्न कारणों और प्रकारों के साथ-साथ पांडु (एनीमिया) के लक्षणों और उपचार विधियों की जानकारी दी। कार्यक्रम में कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान, कुलसचिव प्रो. ब्रिजेंद्र सिंह तोमर, प्राचार्य प्रो. आशीष मेहता, विभागाध्यक्ष प्रो. नीलम, एसोसिएट प्रो. नेहा लांबा, डॉ. प्रीति सिंह गहलावत सहित बड़ी संख्या में शिक्षक व विद्यार्थी मौजूद रहे।

चिकित्सा अनुसंधान में बॉयोस्टैटिसटिक्स की अहमियत : प्रो. मुकेंद्र

दूसरे सत्र में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सांख्यिकी एवं संक्रियात्मक अनुसंधान विभागाध्यक्ष प्रो. मुकेंद्र सिंह कादियान ने एसपीएसएस सॉफ्टवेयर के माध्यम से बायोस्टैटिसटिक्स एनालिसिस करने की प्रक्रिया समझाई।
उन्होंने कहा कि बायोस्टैटिसटिक्स केवल आंकड़ों की गणना नहीं बल्कि चिकित्सा पद्धतियों की वैज्ञानिक पुष्टि का आधार है। आयुर्वेद जैसी परंपरागत चिकित्सा प्रणाली को वैश्विक मंच पर मान्यता दिलाने में यह सेतु का कार्य करता है।
बायोस्टैटिसटिक्स की मदद से दवाओं की प्रभावशीलता, दुष्प्रभावों की निगरानी, औषध निर्माण का मानकीकरण और शोधों के मेटा-विश्लेषण संभव हैं। कोविड-19 महामारी में संक्रमण दर और वैक्सीन प्रभावशीलता की पुष्टि में इसकी महत्ता सिद्ध हो चुकी है।

कुरुक्षेत्र।  श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम में संबोधित करते

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