कुरुक्षेत्र। आयुर्वेदिक कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार रखते कुलपति प्रो. वैद्य करतार
कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के कार्य चिकित्सा विभाग की ओर से आयोजित साप्ताहिक सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम का सोमवार को शुभारंभ किया गया। इस दौरान कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है। अगर कुछ नया मिलेगा, तो भारत से ही मिलेगा। कोविड-19 महामारी के दौरान भी आयुर्वेद ने मोर्चा संभाला और काढ़े (क्वाथ) के सेवन से लोगों ने प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत किया।
उन्होंने कहा कि ऐसे सेमिनार से हमें न केवल कुछ नया सीखने को मिलता है बल्कि उसे जीवन में अपनाने की प्रेरणा भी मिलती है। आयुर्वेद ने दुनिया को कई महान लीडर दिए हैं। आज पूरी दुनिया को आयुर्वेद से उम्मीद है, इसलिए हम सबकी जिम्मेदारी है कि इस परंपरा और ज्ञान को पूरी ईमानदारी से निभाएं और आगे बढ़ाएं। मुख्य वक्ता पतंजलि आयुर्वेदिक कॉलेज हरिद्वार के उपप्राचार्य एवं कार्य चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर वैद्य गिरीश केजे और महिला आयुर्वेदिक कॉलेज खानपुर कलां के प्रिंसिपल प्रो. एपी नायक ने शिरकत की।
इस मौके पर आयुष विवि के कुलसचिव प्रो. ब्रिजेंद्र सिंह तोमर, आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य प्रो. आशीष मेहता, डीन एकेडमिक अफेयर प्रो. जीतेश कुमार पंडा सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
शिक्षक का दायित्व केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं : प्रो. गिरीश
पतंजलि आयुर्वेदिक कॉलेज हरिद्वार के उपप्राचार्य एवं कार्य चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर वैद्य गिरीश केजे ने रसायन एवं वाजीकरण विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने मेडिकल एजुकेशन में माइक्रो टीचिंग पैटर्न अपनाने पर जोर दिया और शिक्षकों को पुराने तरीकों के बजाय नई शिक्षण पद्धति अपनाने की सलाह दी। प्रो. गिरीश ने प्रतिभागियों को चार समूहों में विभाजित कर नए टास्क दिए और बताया कि शिक्षक का दायित्व केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं है बल्कि विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान करना भी उतना ही जरूरी है।
रोग के सही निदान से उचित चिकित्सा संभव : प्रो. नायक
दूसरे सत्र में भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय के महिला आयुर्वेदिक कॉलेज खानपुर कलां के प्रिंसिपल प्रो. एपी नायक ने वात व्याधि विषय पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आयुर्वेदिक चिकित्सा में सबसे पहले साम निराम वात का निर्धारण करना आवश्यक है। इसी आधार पर आगे की चिकित्सा प्रभावी ढंग से की जा सकती है। प्रो. नायक ने कहा कि सबसे अधिक मरीज वात व्याधि से पीड़ित पाए जाते हैं। इनमें संधिगत वात के मामले प्रमुख हैं। उन्होंने शिक्षकों को समझाया कि इस रोग के क्या लक्षण होते हैं और आयुर्वेद के अनुसार किस प्रकार उपचार किया जाता है। व्याख्यान के दौरान उन्होंने 60 वर्षीय महिला मरीज का उदाहरण दिया जिसे जोड़ों में लगातार दर्द और वजन कम होने की समस्या थी।