संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर के 37 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। लेकिन इस भर्ती को लेकर छात्रों में असंतोष देखा जा रहा है। दरअसल, विश्वविद्यालय ने भर्ती के लिए तीन साल का सहायक प्रोफेसर के तौर पर अनुभव अनिवार्य किया है, जिससे विश्वविद्यालय से एमडी कर चुके छात्र आवेदन से वंचित हो गए हैं।
आयुष विश्वविद्यालय में एमडी पाठ्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2019 में हुई थी। यह कोर्स तीन साल का होता है और अब तक यहां से कई विद्यार्थी पास आउट हो चुके हैं। लेकिन अनुभव की शर्त के कारण वे पात्र नहीं माने गए। ऐसे में प्रदेश के एकमात्र आयुष विवि से एमडी करने वाले छात्र पीछे रह गए हैं, जबकि अन्य प्रदेशों से पढ़े उम्मीदवार आवेदन कर पा रहे हैं।
छात्रों का कहना है कि जब विश्वविद्यालय ने खुद ही यह कोर्स शुरू किया और अभी तक तीन साल से अधिक का समय नहीं हुआ, तो विश्वविद्यालय से निकले छात्रों के पास तीन साल का अनुभव कैसे हो सकता है। ऐसे में यह शर्त उनके भविष्य के साथ अन्याय है।
एमडी पास 22 छात्रों ने इस शर्त को चुनौती देते हुए पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में उन्होंने कहा है कि नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन द्वारा जारी 2022 की अधिसूचना के अनुसार सहायक प्रोफेसर के लिए किसी अनुभव की अनिवार्यता नहीं है। फिर भी विश्वविद्यालय ने तीन साल के अनुभव को अनिवार्य कर दिया है।
विश्वविद्यालय अपने सेवा नियमों में करें संशोधन
छात्रों की मांग है कि विश्वविद्यालय अपने सेवा नियमों में संशोधन कर अनुभव की शर्त हटाए और नई विज्ञप्ति जारी करे। साथ ही कोर्ट से यह भी अनुरोध किया गया है कि मामले के निर्णय तक भर्ती प्रक्रिया स्थगित की जाए या उन्हें भी आवेदन की अनुमति दी जाए। छात्रों को उम्मीद है कि न्यायालय उनके पक्ष में निर्णय देगा ताकि उनका भविष्य सुरक्षित रह सके। इस मामले में अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।
भर्ती सरकार से स्वीकृत सेवा नियमों के तहत की जा रही
कुलसचिव प्रो. ब्रिजेंद्र सिंह तोमर का कहना है कि भर्ती सरकार से स्वीकृत सेवा नियमों के तहत की जा रही है और छात्रों द्वारा उठाई गई आपत्ति पर निर्णय अब न्यायालय करेगा। इन पदों पर आवेदन की अंतिम तिथि नौ अक्तूबर रखी गई है।
बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ : प्रो राणा
आयुष सर्व अध्यापक कल्याण समिति के अध्यक्ष प्रो. अशोक राणा का कहना है कि सहायक प्रोफेसर के पदों के लिए तीन साल का अनुभव मांगना विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। विश्वविद्यालय प्रशासन को कॉलेज से पड़े विद्यार्थियों को प्राथमिकता देनी चाहिए।