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मन के अनुरूप ही होता है प्रत्येक कर्म : भारती

Mon, 04 Aug 2025 02:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
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कुरुक्षेत्र। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम साप्ताहिक सत्संग में हिस्सा लेते श्रद्धालु। विज
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कुरुक्षेत्र। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में रविवार को साप्ताहिक सत्संग समागम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर दिव्य गुरु आशुतोष की शिष्या साध्वी सत्या भारती ने मन की गति के बारे में बताया।
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उन्होंने कहा कि मन विचारों का समूह है, लेकिन अपना अस्तित्व न होते हुए भी मन बहुत शक्तिशाली है। हमारी ओर से किया गया प्रत्येक कर्म मन के विचारों के अनुरूप ही होता है। मन में उठी एक विचार की तरंग किसी घटना या दुर्घटना को जन्म दे सकती है इसलिए हमारे संत महापुरुष कहते हैं कि अपने मन में उठने वाले प्रत्येक विचार की ओर ध्यान दें।
उन्होंने कहा कि आज संपूर्ण मानव समाज को ब्रह्मज्ञान रूपी संजीवनी की अति आवश्यकता है क्योंकि हम अपने आस पास इन विकारों के प्रभाव को स्पष्ट देख पा रहे हैं। आज मनुष्य कहीं भी सुरक्षित नहीं है। साध्वी ने इस विकट समस्या का निवारण देते हुए कहा कि यदि समाज की स्थिति को सुधारना है तो प्रत्येक मनुष्य को अपनी मनोस्थिति पर कार्य करना ही होगा। ंब्रह्मज्ञान ऐसी ब्रह्म विद्या है, जिसके द्वारा आत्मा अपने वास्तविक सच्चिदानंद स्वरूप से जुड़ जाती है। फिर ऐसी ब्रह्मज्ञानी साधक से निरंतर जो दिव्य तरंगें प्रवाहित होती हैं, उनके द्वारा उसका स्वयं का जीवन और आस पास का वातावरण भी दिव्य व पावन हो जाता है। संवाद
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