कुरुक्षेत्र। शिव महापुराण कथा में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु। विज्ञप्ति
कुरुक्षेत्र। पटियाला बैंक कॉलोनी के मनोकामना सिद्ध श्री शिव मंदिर के वार्षिकोत्सव के उपलक्ष्य में श्री शिव महापुराण कथा में कथाव्यास आचार्य रमेश उनियाल (हरिद्वार) ने नारद मोह प्रसंग और दान की महिमा भजनों के जरिए में सुनाया।इस प्रसंग से यह शिक्षा मिलती है कि ज्ञान और तपस्या के बाद भी अहंकार पतन का कारण बनता है। भगवान की माया से कोई नहीं बच सकता। पुजारी पंडित उमेश पाठक ने सुबह यजमानों से शिव पूजन कराया। व्यासपीठ से उन्होंने कहा कि यह एक शिक्षाप्रद कथा है, जिसमें कामदेव पर विजय पाने के बाद नारद मुनि को अहंकार हो गया था।
अहंकार तोड़ने के लिए भगवान विष्णु ने अपनी माया से नारद को एक सुंदरी के मोह में डाला, जिससे वे बंदर का मुख पाकर बंदर बन गए और विवाह में असफल रहे। यह कथा अहंकार के पतन और ईश्वर की माया का वर्णन करती है। नारद जी ने भगवान शिव के गणों के कामदेव को जीतने पर अभिमान किया, जिसे विष्णु जी ने अपने भक्त के कल्याण के लिए तोड़ने का निश्चय किया। विष्णु जी ने एक अत्यंत सुंदर नगरी और शीलनिधि राजा की पुत्री का निर्माण किया, जिस पर नारद मोहित हो गए। नारद जी ने विष्णु जी से सुंदरी को रिझाने के लिए हरि(विष्णु जी का सुंदर रूप) मांगा, लेकिन विष्णु जी ने उन्हें बंदर का मुख दे दिया। नारद जी बंदर के मुख के साथ स्वयंवर में गए, जहां राजकुमारी ने उन्हें अनदेखा कर दिया। बाद में जल में अपना मुख देखकर नारद जी को अपनी कुरूपता और विष्णु जी की माया का एहसास हुआ। आचार्य द्वारिका प्रसाद मिश्र, सौरभ शास्त्री, उज्ज्वल शर्मा और सौर्यांश तिवारी,सीताराम कश्यप, मुख्य यजमान विनोद सिंगला, बीएन शर्मा, सुनील सिंगला, अश्वनी मित्तल, जसविंदर मांद्रा, दर्शन पुरी और महिंदर खन्ना सहित अन्य श्रद्वालु भी शामिल रहे।