कुरुक्षेत्र। छठ पर्व को लेकर ब्रह्मसरोवर के आसपास लगी दुकानेां पर खरीददारी करते श्रद्वालु। संवा
कुरुक्षेत्र। छठ पर्व के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह बना हुआ है। दूसरे दिन भी न केवल व्रतियों ने श्रद्धापूर्वक खरना किया बल्कि अन्य लोगों ने भी जमकर खरीदारी की। ब्रह्मसरोवर के आसपास पूरा दिन मेले जैसा माहौल रहा। हालांकि खरना के दिन ब्रह्मसरोवर पर स्नान के लिए श्रद्धालु नहीं पहुंचे लेकिन पूजा-अर्चना की गई। शनिवार को पहले दिन नहाय खाय से शुरू हुआ महोत्सव चार दिन तक चलेगा जिसके चलते बाजारों में भी चहल-पहल बनी रही। श्रद्धालुओं ने जमकर खरीदारी की।
खरना का मतलब ही शुद्धता : पूर्वांचल समाज महासभा हरियाणा के प्रधान संतोष पासवान ने बताया कि खरना का अर्थ होता है, शुद्धता। ऐसे में इस दिन पर शुद्धता व पवित्रता का खास तौर से ध्यान रखा जाता है, ताकि पूजा में किसी तरह की बाधा न आए। इस दिन पर व्रती प्रसाद बनाने के लिए मिट्टी के नए चूल्हे का इस्तेमाल करती हैं। साथ ही चूल्हा जलाने के लिए आम की लकड़ियों का इस्तेमाल किया जाता है जिससे प्रसाद की पवित्रता बनी रहती है। इस दिन पूरे दिन व्रत रखने के बाद शाम को देवी-देवताओं और छठी मैया को भोग लगाने के बाद व्रत का पारण किया जाता है।