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Kurukshetra News: जैविक खेती अपनाने पर दिया जोर

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कुरुक्षेत्र। जैविक खेती पर्यावरण संतुलन के लिए वरदान है। ये फसल उत्पादन की एक ऐसी प्राचीन कृषि विधि है, जो किसानों को मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण को संतुलित बनाए रखने में मदद करती है।
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ये विचार वीरवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. वीरेंद्र पाल ने इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड एंड आनर्स स्टडीज (आईआईएचएस) के सामने मैदान में विद्यार्थियों द्वारा संचालित जैविक खेती के निरीक्षण के उपरांत व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जैविक खेती केवल एक कृषि पद्धति नहीं, बल्कि एक विचारधारा है, जो हमें प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखने की सीख देती है। यह न केवल हमारे स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता, जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने जैविक खेती अपनाने पर जोर दिया।
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