कुरुक्षेत्र। बिजली निगम के निजीकरण और डिस्कॉम व्यवस्था लागू करने के विरोध में कर्मचारियों का आंदोलन तेज हो गया है। सोमवार को जिलेभर की सभी सब यूनिट कार्यालयों पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
यदि मांगे न मानी गईं तो 11 अगस्त से प्रदेश स्तरीय हड़ताल होगी। प्रदेश स्तरीय हड़ताल से आमजन की रोजमर्रा की जिंदगी पर सीधा असर पड़ सकता है। बिजली, पेयजल आपूर्ति, ट्यूबवेल, घरेलू जरूरतें, दुकानें और छोटे उद्योग प्रभावित होंगे। कर्मचारी और अधिकारी काम बंद रखेंगे, जिससे फॉल्ट ठीक करना चुनौती होगा। सोशल मीडिया पर लोगों से 10 अगस्त तक आटा पिसवाने की अपील की गई है।
पशुओं के लिए तीन दिन का चारा और चोकर जुटाने को भी कहा गया है। घर में तीन दिन का पानी स्टॉक करने की सलाह दी गई है।
इन्वर्टर पर कम लोड डालें और 14 अगस्त तक रोशनी का प्रबंध रखें। किसानों को जीरी के खेत भरने को कहा गया है। इंडक्शन चूल्हे की जगह उपले इस्तेमाल करने की सलाह है। हड़ताल बढ़ने पर समस्या और गंभीर हो सकती है। यह प्रदर्शन संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले होगा।
इंजीनियर एसोसिएशन से जुड़े अभियंता भी इसमें शामिल होकर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे। इसमें निजीकरण और डिस्कॉम लागू करने की मांगें प्रमुखता से उठाई जाएंगी। सर्कल प्रधान कृष्ण चौहान ने बताया कि सरकार ने अभी तक मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाई है। उन्होंने कहा कि सोमवार का धरना सरकार के लिए अंतिम चेतावनी है।
यदि निजीकरण प्रक्रिया नहीं रोकी गई, तो मंगलवार 11 अगस्त से प्रदेश स्तर पर हड़ताल होगी। इस हड़ताल में हजारों कच्चे-पक्के कर्मचारी और अधिकारी शामिल होंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
मोर्चा पदाधिकारियों के अनुसार, कर्मचारी, कनिष्ठ अभियंता, उपमंडलीय अधिकारी और अन्य अधिकारी पहले भी विरोध जता चुके हैं। अब सभी को एकजुट कर आंदोलन को निर्णायक चरण में ले जाने की तैयारी है। बिजली क्षेत्र का निजीकरण होने से कर्मचारियों के हित प्रभावित होंगे। इससे आम उपभोक्ताओं और नई पीढ़ी के पक्के रोजगार पर भी दुष्प्रभाव पड़ेगा। इसलिए निजीकरण और डिस्कॉम को रोकना बहुत आवश्यक है।