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गीता विवि नाम का प्रस्ताव रख फंसे शिक्षा मंत्री, दी सफाई

Sat, 19 Dec 2015 12:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/ कुरुक्षेत्र
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प्रदेश की पहली यूनिवर्सिटी का नाम बदलने का जिन्न भाजपा सरकार में फिर बाहर आ गया है।
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इस बार प्रदेश के शिक्षा मंत्री ने यह प्रस्ताव राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी के सामने रख दिया। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी का नाम बदलकर गीता यूनिवर्सिटी कर दिया जाए। उनके प्रस्ताव रखते ही कार्यक्रम में इसके विरोध में सुगबुगाहट शुरू हो गई।

इसकी जानकारी होते ही शिक्षा मंत्री ने अपना बचाव करते हुए सफाई दी। कई छात्र संगठन और सामाजिक संगठन भी शिक्षा मंत्री के प्रस्ताव के विरोध में मुखर हो गए। उन्होंने अपनी रणनीति बनाना भी शुरू कर दिया है।
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गीता जयंती समारोह के अंतर्गत विश्वविद्यालय में शुक्रवार को श्रीमद् भगवद् गीता की सार्वभौम प्रासंगिकता विषय पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें मुख्य अतिथि राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी शामिल थे। अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर कार्यवाह सुरेश जोशी भैया जी ने की। विशिष्ठ अतिथि प्रदेश के शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा थे।

उन्होंने अपना भाषण समाप्त करने के बाद दोबारा से मंच पर आकर राज्यपाल के समक्ष केयू का नाम बदलकर गीता विश्वविद्यालय करने का प्रस्ताव रख दिया। उनके प्रस्ताव रखते ही केयू सभागार में विरोध शुरू हो गया। लोगाें ने चर्चा करना शुरू कर दिया।

हालांकि, राज्यपाल ने अपने संबोधन के दौरान शिक्षा मंत्री के इस प्रस्ताव पर कुछ भी नहीं कहा। संगोष्ठी समाप्त होते ही शिक्षा मंत्री शर्मा इस प्रस्ताव पर सफाई देते नजर आए। उन्होंने कहा कि उन्हें गीता जयंती पर संतों ने ही यह प्रस्ताव दिया था।

उसे ही उन्होंने राज्यपाल के समक्ष रखा है। इस पर अगला कदम राज्यपाल को उठाना है। इस बारे में बाद में राज्यपाल ने कहा कि अभी शिक्षा मंत्री ने प्रस्ताव रखा था। लेकिन, इस पर कोई भी कदम उठाए जाने का विचार नहीं है।

पहले भी दो बार हो चुका है  प्रयास
केयू का नाम बदले जाने का यह पहला प्रयास नहीं है। इससे पहले भी दो बार कोशिश हो चुकी है। सबसे पहले पूर्व राज्यपाल हरियाणा के प्रथम राज्यपाल स्व. बीएन चक्रवर्ती के नाम पर बदलने का प्रयास हुआ था। उस समय भी छात्रों से लेकर धार्मिक और सामाजिक संगठन और अन्य लोग भी सड़कों पर उतर आए थे।

इसके चलते तत्कालीन सरकार का यह प्रयास सफल नहीं हो पाया। इसके बाद चौटाला सरकार में एक बार फिर केयू का नाम बदले जाने की बात आई। केयू में ही आयोजित एक कार्यक्रम में तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने इसका नाम गुरुगोविंद सिंह यूनिवर्सिटी करने का प्रस्ताव रखा।

इसका भी कड़ा विरोध हुआ। इस पर तत्कालीन सरकार झुक गई। अब प्रदेश के शिक्षा मंत्री ने फिर इस विवाद को जन्म दे दिया है। इसका भी विरोध शुरू हो गया।

छात्र संगठन आज बना सकते रणनीति
विश्वविद्यालय का नाम बदले जाने के विरोध में कई छात्र संगठन लामबंद होना शुरू हो गए हैं। इनसो के नेता सुनील राणा ने कहा कि भाजपा सरकार का शिक्षा को पूरी तरह से संघ के रंग में रंगने का प्रयास है। इसे सफल नहीं होने दिया जाएगा। केयू की पूरे विश्व में अलग पहचान है।

इसका नाम बदलने का विरोध किया जाएगा। इनसो के सभी कार्यकर्ता शनिवार को एकत्रित होंगे और कुलपति को विरोध में ज्ञापन सौपेंगे।  एक अन्य छात्र संगठन बीपीएसओ ने भी इस प्रस्ताव का विरोध करने के लिए रणनीति बनाना शुरू कर दिया है।
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कुरुक्षेत्र की सामाजिक संस्था श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा के संरक्षक और पूर्व नप उपाध्यक्ष जयभगवान शर्मा ने कहा कि कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी का नाम नहीं बदलने दिया जाएगा। इसका विरोध किया जाएगा।
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