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फिनलैंड के डस्टबिन से गंदगीमुक्त करने की तैयारी

Tue, 21 Mar 2017 12:14 AM IST
ब्यूरो/कुरुक्षेत्र,अमर उजाला
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hitech undergraund place - फोटो : अमर उजाला
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धर्मनगरी को कचरामुक्त बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया गया है। इसके लिए फिनलैंड से हाईटेक डस्टबिन मंगाए जाएंगे। इसी कड़ी में इसकी शुरुआत एक अर्धभूमिगत कचरा पात्र लगाकर की जा रही है। यदि शहर में आवश्यकता के लिहाज से यहां पर्याप्त संख्या में ऐसे डस्टबिन लगेंगे तो नाली और सड़कों पर कूड़ा कचरा ढूंढने पर भी नहीं मिलेगा।      
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यदि धर्मनगरी में ऐसे 500 डस्टबिन लग जाएं तो कुरुक्षेत्र की सुंदरता में चार चांद लग जाएंगे। इसकी विशेषता यह है कि डेढ़ टन गंदगी होने के बावजूद इसके पास बैठकर चाहे अखबार पढ़ो या खाना खाओ। यह पहला हाईटेक डस्टबिन पंजाबी धर्मशाला और पशु अस्पताल के गेट के ठीक सामने लगने जा रहा है। पॉलिथीन विद पॉलिस्टर से तैयार इस डस्टबिन की 10 साल की गारंटी फिनलैंड की कंपनी देती है। हालांकि कंपनी इसको 25 वर्षों में भी खराब ना होने के उदाहरण देती है।

इस कार्य में बड़ी भूमिका अजमेर (राजस्थान) की जागृति फाउंडेशन निभा रही है। फाउंडेशन संस्थापक ट्रस्टी एनआरआई अनिल त्रिपाठी ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में बताया कि फाउंडेशन का लक्ष्य भारत को उन्नत और भ्रष्टाचार मुक्त राष्ट्र बनाकर जन जागृति लाना है। उन्होंने बताया कि देश में हरियाणा दूसरा ऐसा राज्य है, जिसके कुरुक्षेत्र में सबसे पहले ऐसे डस्टबिन लगने जा रहे हैं। इससे पहले यह अर्धभूमिगत कचरा पात्र जनवरी 2015 में राजस्थान के पुष्कर में लगाया गया था।
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एक डस्टबिन की कीमत दो लाख 11 हजार
एक डस्टबिन की कीमत वैट जोड़कर दो लाख 11 हजार रुपये है। जिले की जनसंख्या के लिहाज से यहां करीब 500 अर्धभूमिगत कचरा पात्र लगाने की आवश्यकता है। माना जाता है कि यदि 500 लोगों पर एक कचरा पात्र लगाया जाए तो उसे एक सप्ताह में एक बार खाली किया जाता है। यदि 500 ऐसे डस्टबिन लगते हैं तो शहर लगभग कचरा मुक्त दिखने लगेगा। सरकार ने फिलहाल यह डस्टबिन लगाने की सहमति दी है। इसके बाद न्यू भारत इंजीनियरिंग सॉलिड वेस्ट प्राइवेट लिमिटेड कुरुक्षेत्र के एमडी मुकेश सैनी ने यह पहला डस्टबिन लगाने का आर्डर जागृति फाउंडेशन अजमेर (राजस्थान) को दिया है।

हरियाणा में पहले अर्धभूमिगत कचरा पात्र पर करीब चार लाख रुपये खर्च होंगे और फाउंडेशन को यह पूरा खर्च न्यू भारत इंजीनियरिंग सॉलिड वेस्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी देगी। जागृति फाउंडेशन के ट्रस्ट अनिल त्रिपाठी के मुताबिक अभी फिनलैंड से अर्धभूमिगत कचरा पात्र मंगाने पर इसकी कीमत ज्यादा पड़ रही है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही ऐसे कंटेनर भारत में भी बनना शुरू होंगे और इनकी कीमत काफी कम होगी। उन्होंने बताया कि ऐसे डस्टबिन का निर्माण करने के लिए वह रतन टाटा को प्रजेंटेशन दे चुके हैं।       
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अभी शहर में है यह सफाई व्यवस्था      
1-शहर में प्रतिदिन 70 टन कचरा निकलता है      
2-नियमानुसार 400 लोगों पर एक सफाई कर्मी की आवश्यकता होती है      
3-परिषद के पास सिर्फ 421 सफाई कर्मी हैं, जिनमें केवल 104 कर्मी ही स्थायी हैं
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