पुलिस भर्ती के दौरान दौड़ लगाते अभ्यर्थी।
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पुलिस भर्ती प्रक्रिया नशे के गिरफ्त से निकल नहीं पा रही। शुक्रवार को भी 10 अभ्यर्थियों को रंगेहाथ नशे का सेवन करते पकड़ने का मामला सामने आया है। हालांकि, देर शाम तक इनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई नहीं होने के कारण इनके नामों का खुलासा नहीं किया गया। एसपी ने ऐसे अभ्यर्थियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।
भर्ती प्रक्रिया के दौरान संदिग्ध हालात में तीन युवकों की मौत भी हो चुकी है। वहीं कई अभ्यर्थियों के नशे की गिरफ्त में होने की बात सामने आने के बाद भी ऐसे मामले थम नहीं रहे हैं। शुक्रवार को पुलिस ने कुछ युवकों को नशीले पदार्थ समेत पकड़ा था। मेडिकल के बाद इन्हें चेतावनी देकर छोड़ा गया है। पुलिस अधीक्षक ने भी इस बात को स्वीकारा है कि फिजिकल टेस्ट देने पहुंच रहे अधिकतर अभ्यर्थी नशे की गिरफ्त में है। नशे पर नियंत्रण करने के लिए अभ्यर्थियों के बीच सादे कपड़ों में पुलिस के जवान रहने लगे हैं। जो भी अभ्यर्थी नशा करता दिखता है, उसे वह तुरंत पकड़ लेते हैं। शुक्रवार को पुलिस भर्ती में लगभग आठ हजार अभ्यर्थी फिजिकल टेस्ट पहुंचे। इनमें से लगभग आधा दर्जन युवक गर्मी और अन्य कारणों के चलते दौड़ लगाते समय गिर पड़े।
नशा करते पकड़े तो होगी कार्रवाई: एसपी
एसपी सिमरदीप सिंह ने माना कि भर्ती प्रक्रिया में फिजिकल टेस्ट पूरा करने के लिए कुछ अभ्यर्थी नशे का सेवन कर रहे हैं। शुक्रवार को भी कुछ युवक पकड़े गए थे। उनका चिकित्सकीय परीक्षण करवाने के बाद चेतावनी देकर छोड़ा गया है। फिजिकल टेस्ट के दौरान अभ्यर्थी किसी भी प्रकार के नशे का सेवन न करें। ऐसे अभ्यर्थियों पर नजर रखी जा रही है। जो भी अभ्यर्थी नशे का सेवन करते मिला, उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
कैथल से बुलाए पुलिस जवान
पुलिस भर्ती में हो रही अनुशासनहीनता को रोकने के लिए भर्ती स्थल पर जवानों की संख्या बढ़ा दी गई है। शुक्रवार को प्रशासन ने कैथल पुलिस के जवानों को बुलाया। वीरवार को एक अभ्यर्थी ने दौड़ पूरी होने के बाद चार लैपटॉप तोड़ दिए थे। इतना ही नहीं कुछ अभ्यर्थियों ने मिलकर अभ्यर्थियों के लिए लगाए गए बैरिकेड तक तोड़ दिए थे।
अभ्यर्थियों के लिए बनाया अलग वार्ड
पुलिस भर्ती की प्रक्रिया में आए दिन घायल हो रहे अभ्यर्थियों के लिए कुरुक्षेत्र सिविल अस्पताल में अलग वार्ड बनाया गया है। इसमें केवल पुलिस द्वारा भेजे गए अभ्यर्थियों का उपचार होगा। विभाग ने यह फैसला इसलिए लिया है कि एक ही वार्ड में भर्ती युवकों का आराम से इलाज हो सके।